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Siddharthnagar News: बेटों के गम में वृद्ध मां ने तोड़ा दम

Sat, 13 May 2023 01:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर/घोसियारी। खेसरहा थाना क्षेत्र के दनियापार गांव में जमीन के विवाद में छोटे बेटे द्वारा बड़े की हत्या के छह दिन बाद मां रामपति की शुक्रवार को मौत हो गई। परिवार के लोगों का कहना है कि बड़े बेटे की हत्या और छोटे के जेल जाने के बाद रामपति सदमे में थीं। बार-बार दोनों बेटों का ही नाम ले रहीं थीं।
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शुक्रवार सुबह वृद्धा ने दम तोड़ा और दोपहर में उनका अंतिम संस्कार हो गया। बड़े बेटे की मौत हो गई, छोटा बेटा जेल में हैं। वहीं, मझला बेटा एक धर्म की पूजा करता है, इसलिए वह मुखाग्नि नहीं दे सका। ऐसे में पोते ने दादी की चिता को आग दी। एक सप्ताह के भीतर दूसरी मौत ने परिवार के लोगों का हिला कर रख दिया है।
क्षेत्र के दनियापार गांव में छह मई की रात जमीन के विवाद में गांव निवासी ब्रह्मानंद के छोटे भाई फूलचंद ने हमला करके उनकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने हत्या का केस दर्ज करके फूलचंद, उसके दो बेटों और घटना में शामिल एक अन्य आरोपी को जेल भेज दिया था। रामपति (85) बड़े पुत्र ब्रह्मानंद की मौत और फूलचंद और दो पौत्रों के जेल जाने के बाद काफी सदमे में थीं। घटना के बाद से रामपति हमेशा दोनों बेटों का ही नाम ले रहीं थीं। खाना-पानी बहुत ही कम कर दिया था। परिवार के लोग समझाते रहे, लेकिन वह बार-बार दोनों बेटों को ही याद कर रही थीं। हमेशा यही कह रही थीं कि किस तरह दोनों बड़े हुए, खुशी से रहते थे। लेकिन हमें नहीं पता था कि एक दिन एक बेटा दूसरे की जान ले लेगा। शुक्रवार सुबह गम में मां ने दम तोड़ दिया। एक तो पहले ही चला गया तो दूसरा जेल में है और तीसरे बेटे ने मुखाग्नि देने से इसलिए इन्कार कर दिया क्योंकि वह अलग धर्म की पूजा करता है। ऐसे में मृतक ब्रह्मानंद के पुत्र जगदीश ने दादी की चिता को आग लगाई।
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दोनों भाइयों के झगड़े से बहुत आहत हूं
मृतक रामपति के मझले पुत्र दुर्गा प्रसाद ने बताया- करीब 20 साल मैंने विदेश में बिता दिया। बड़े भाई से सदैव पिता का प्यार मिला। मैं घर से एक किलोमीटर दूर चौराहे पर मकान बनाकर रहता था। मां को बड़े भाई के साथ रहने में कोई तकलीफ नहीं थी। वह हमेशा बड़े भाई के साथ खुश रहती थीं। दोनों भाइयों के बीच झगड़े से मैं भी बहुत आहत हूं।

टूटा गया जगदीश
एक सप्ताह में पिता फिर दादी की चिता को अग्नि देने से जगदीश टूट गया है। उसे रोता हुआ देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। छह दिन पहले उसे पिता की चिता की आग लगाई थी। अब दादी को। छह दिन के भीतर एक ही घर में दो घटनाओं से गांव में भी मातम का माहौल है।
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