सिद्धार्थनगर। जल जीवन मिशन के 500 से अधिक प्रोजेक्ट अधूरे हैं। इस कारण जिले की दो तिहाई आबादी को शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। एक अनुमान के मुताबिक 20 लाख आबादी के घरों में टोटी का पानी नहीं पहुंचा है। सक्षम लोग आरओ वॉटर खरीदकर बीमारियों से बचने की कोशिश में हैं, जबकि अन्य लोग आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। इस कारण जिले के लोग कैंसर सहित अन्य बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
जल जीवन मिशन के दो तिहाई प्रोजेक्ट अधर में अटके हैं, जो संचालित है, लेकिन उनके भी कार्य पूर्ण नहीं है। इससे सरकार की मंशानुसार मार्च 2024 तक सभी को शुद्ध जल मुहैया कराना संभव होता नहीं दिख रहा। वर्तमान में यहां के दो तिहाई लोग 120 फीट के अंदर लगे निजी हैंडपंप का अशुद्ध पानी उपयोग कर रहे है। जांच में 120 फीट के अंदर के पानी में अधिक आयरन के कारण अशुद्ध है। इसमें आर्सेनिक और फ्लोराइड होने की आशंका है। दो साल से हैंडपंप के पानी की जांच नहीं हो रही है। इस कारण पानी की शुद्धता की रिपोर्ट सामने नहीं आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार नदी एवं ताल क्षेत्र के आसपास के पानी में आर्सेनिक व फ्लोराइड मिलने की आशंका रहती है। जिले के ढेबरूआ क्षेत्र में छह साल पहले पानी में आर्सेनिक पाया गया था। जिले की अनुमानित आबादी में 30 लाख आबादी में दो तिहाई को शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है।
जिले के 11 नगर निकायों एवं 1136 ग्राम पंचायतों को जल निगम की तरफ से पेयजल उपलब्ध कराना है। इन ग्राम पंचायतों के 2400 से अधिक टोले के 28 लाख से अधिक आबादी को पेयजल मुहैया कराने का जिम्मा जल निगम ग्रामीण पर है। जबकि 11 नगर निकायों में जल निगम शहरी को पानी मुहैया कराना है। जल निगम ग्रामीण की जिले में संचालित प्रोजेक्ट पर नजर दौड़ाए तो इनमें 98 वाॅटर हेड टैंक से पानी सप्लाई पहले से हो रही है। जबकि जिले के संपूर्ण ग्रामीण आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के 762 नए प्रोजेक्ट स्थापित की जानी है।
विभागीय आंकड़े के अनुसार इनमें 162 प्रोजेक्ट संचालित कर लोगों के घर तक शुद्ध पानी पहुंचाया जा रहा है। शेष 500 प्रोजेक्ट निर्माणाधीन है। विभाग का दावा है कि वह वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र के 3.92 लाख में 2.58 लाख परिवार का पेयजल उपलब्ध करा रहा है। जबकि हकीकत कुछ और है। वहीं शहरी जल निगम की तरफ से शहर के आठ स्थानों पर वाटरहेड टैंक का निर्माण कार्य भी अभी शुरू नहीं हो पाया है।
बिना टंकी बनाए 159 जगह कर रहे सप्लाई
जल निगम ग्रामीण की तरफ से संचालित की गई 162 प्रोजेक्ट में अभी तक सिर्फ तीन में ही वाटरहेड टैंक बना है। शेष में बोरिंग से सीधे लोगों के घर तक बिछे पाइप के माध्यम से पानी सप्लाई की जा रही है। इनमें भी कई जगह पर पाइप क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों के घर तक गंदा पानी पहुंच रहा है। जल निगम की इन 176 प्रोजेक्ट पर तीन वर्ष पहले काम शुरू हुआ था, जिन्हें एक वर्ष पहले ही पूरा हो जाना था। लेकिन बेहद धीमी गति के कारण अब तक पूर्ण नहीं हो सका है। जबकि अन्य प्रोजेक्ट पर अभी कार्य शुरू हुआ है।
एक बंद, दूसरे से सिर्फ नीचे होती है सप्लाई
शहर के कांशीराम आवास के पास बनी एक पानी की टंकी से वाटर सप्लाई दो वर्ष से बंद है। वहीं दूसरी पानी की टंकी से कांशीराम समेत आसपास के क्षेत्र में पानी सप्लाई की जा रही है। तीन मंजिला कांशीराम आवास के ग्राउंड फ्लोर पर पाइप के माध्यम से सार्वजनिक टोटियों में पानी सप्लाई होती है, लेकिन इसके किसी भी फ्लैट में वाटर सप्लाई नहीं पहुंचती है। यहां तक कि प्रथम व द्वितीय तल पर रहने वाले लोग कतार लगाकर प्रतिदिन टोटी से बाल्टी में पानी ढोकर ले जाते है।
इटवा कस्बा में शोपीस बना वाटरहेड टैंक
इटवा। तहसील क्षेत्र के किसी भी जगह पर वाटरहेड टैंक संचालित नहीं है। नगर पंचायत इटवा के अमौना में 20 वर्ष पूर्व पानी टंकी का निर्माण हुआ था। इससे आसपास के 12 सौ परिवारों को शुद्ध पानी मिलना था, परंतु निर्माण के बाद से ही किसी परिवार को शुद्ध जल मुहैया नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां बना पानी टंकी सिर्फ शोपीस बनकर रह गई है। यहां के राम शब्द उपाध्याय बताते हैं कि इस टंकी से पानी की आपूर्ति कभी नहीं हुई है।
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अधूरे टैंक से हो रहा गंदा पानी का सप्लाई
भनवापुर। ब्लाॅक क्षेत्र में गनवरिया खुर्द गांव में बने वाटर टैंक से गनवरिया बुजुर्ग व खुर्द के करीब 150 घरों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है, करीब तीन माह से केवल टैंक व बोरवेल लगा कर पानी की सप्लाई की जा रही है,जो गंदा पानी आता है। गांव के संजय मिश्रा ने बताया कि वाटर टैंक का अभी तक पूरा सांचा भी नही खुला और न ही टैंक के ऊपर ढक्कन है। पानी सप्लाई की जाती है मगर वह पीने लायक नहीं है। पानी गंदा होने के कारण लोग पशुओं को पीने व कपड़ा, बर्तन की धुलाई में उपयोग करते है।
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देरी के कारण पी रहे अशुद्ध पानी
भनवापुर ब्लॉक के सेखुई गोवर्धन में बने वाटर टैंक से गांव व अंदुआ शनिचरा गांव के 200 घरों के ढाई हजार की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है। लेकिन इसके निर्माण में हो रही देरी के कारण यहां के लोगों को अशुद्ध पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरेश चंद्र यादव ने बताया कि चार साल से वाटर टैंक पूरा नहीं किया गया। जिससे यहां के लोगों को मजबूरी में अशुद्ध पानी पीना पड़ रहा है। उन्होंने कार्यदायी कंपनी पर मनमानी करने का आरोप लगाया है।
जल जीवन मिशन के अंतर्गत तीन एजेंसियां कार्य कर रही हैं। तीसरी एजेंसी को पांचवें चरण में देर से कार्य मिला है। प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए हर सप्ताह समीक्षा की जा रही है। मार्च 2024 तक सभी घरों तक शुद्ध पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। एजेंसियों पर दबाव बनाया जा रहा है कि जल्द ही कार्य पूरा करें। ग्रामीण क्षेत्रों में 40 प्रतिशत से अधिक आबादी को शुद्ध पानी मिल रहा है, जबकि प्रोजेक्ट पूरे होने पर सभी घरों तक पानी पहुंच जाएगा।
-मदन राम पाल, अधिशासी अभियंता जलनिगम, ग्रामीण
नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर, नगर पंचायत भारत एवं बढ़नी चाफा में शुद्ध पानी के प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए हैं। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा, जबकि अन्य आठ निकायों की ओर से पानी की आपूर्ति की जा रही है। हालांकि, इन निकायों में भी नए प्रोजेक्ट बनाकर शेष आबादी में पानी की आपूर्ति करनी है।
-रेहान फारूकी, अधिशासी अभियंता, जलनिगम शहरी
आर्सेनिक पानी के लंबे समय तक उपयोग करने से कई गंभीर बीमारी हो सकती है। त्वचा पर घाव और कैंसर इसके सबसे विशिष्ट प्रभाव हैं।
- डॉ. जितेंद्र सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिकल कॉलेज