- प्रतिवर्ष लगभग पांच हजार छात्र उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं बड़े शहरों में
- व्यवस्थाओं के अभाव में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए अभिभावक करते हैं लाखों रुपये खर्च
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में विश्वविद्यालय सहित अनेक महाविद्यालय मौजूद हैं। लेकिन प्रतियोगिता की तैयारी के लिए कोई भी बड़ी इंस्टीट्यूट नहीं हैं। इससे प्रतिवर्ष लगभग पांच हजार छात्र जिले से बाहर दिल्ली व कोटा जैसे बड़े शहरों में तैयारी करने जाते हैं। ऐसे स्थित में अभिभावक अपने बच्चों से दूर होते हैं। वहीं, उनको अपने बच्चों पढ़ाने के लिए लाखों रुपया खर्च भी करना पड़ता है।
जिले में अभ्युदय कोचिंग के दो शिक्षण संस्थान मौजूद हैं, इसमें लगभग 400 छात्र-छात्राएं प्रतियोगिता की तैयारी करते हैं। पिछले दो वर्ष से चल रहे संस्थान में अबतक 10 से 12 बच्चे जेई व नीट की परीक्षाओं में सफलता भी हासिल कर चुके हैं। लेकिन बड़े स्तर की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए छात्रों को दिल्ली, लखनऊ व कोटा जैसे बड़े शहरों में जाने के लिए विवश होना पड़ता है। जिसमें समय लगने के साथ ही परिवार पर आर्थिक बोझ भी पड़ता है। वहां पर छात्रों की गतिविधियाें पर नजर रखने के लिए अभिभावक भी नहीं होते हैं।
उच्च शिक्षा ग्रहण करने की सुविधा नहीं होने के कारण विशेष रूप से छात्राओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बड़े शहरों में पढ़ने के लिए छात्रों को आवश्यकता से अधिक रुपया भी खर्च करना पड़ता हैं। अभिभावकों का माने तो शिक्षण संस्थान दूर होने के साथ खर्च भी अधिक लगता है। लोटन क्षेत्र के अभिभावक पितांबर ने बताया कि उनका छोटा पुत्र लखनऊ में रहकर तैयारी करता है। उसके लिए शिक्षण शुल्क के अलावा दस हजार प्रतिमाह उन्हें खर्च के रूप में देना पड़ता हैं, यदि किसी माह किताब व अन्य वस्तुओं की जरूरत पड़ जाए तो वह रुपया बढ़ कर 15 हजार प्रतिमाह हो जाता हैं। जबकि इंस्टीट्यूट पूरे वर्ष का शिक्षण शुल्क पहले ही जमा करवा लेते हैं।
बोले अभिभावक
अपने बच्चे को नीट की तैयारी करवाने के लिए लखनऊ भेजा है। वहां पर हास्टल फीस एक माह का 10 हजार रुपया लगता है। हास्टल से इंस्टीट्यूट की दूरी अधिक होने से ऑटो का भी किराया लगता है। जिले में बड़े शिक्षण संस्थान खुलने से अभिभावक व छात्र दोनों के लिए फायदेमंद होगा।
मनोज श्रीवास्तव, अभिभावक
अपने बच्चों को इंजीनियरिंग की तैयारी करवाने के लिए लखनऊ भेजे हैं। वहां पर शिक्षण संस्थान का शिक्षण शुल्क व रहने खाने का एक वर्ष का लाख रुपया से अधिक पड़ जाता है। जिले से बच्चों को दूर भेजने में भी समस्या होती है। जिले में कोई भी इंस्टीट्यूट नहीं है।
अनिल अग्रहरि, अभिभावक
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बोले छात्र
जिले में हायर एजुकेशन कि व्यवस्था ठीक नहीं है, तैयारी करने के लिए अन्य शहरों में नहीं आए तो प्रतियोगिता परीक्षा में सफल होने में समस्या होगी। जबकि घर से दूर रहने पर खर्च अधिक लगता है।
राजीव, छात्र
उच्च शिक्षा की तैयारी के लिए जिले में इंस्टीट्यूट नहीं हैं, जबकि अन्य शहरों में इसका विशेष सुविधा हैं। जिले में सुविधा हो तो अपने अभिभावक से दूरी भी नहीं होगी, खर्च भी कम लगेगा। युगांक अग्रहरि, छात्र