नगर पालिका में शामिल 18 गांवों सहित शहर के कई क्षेत्रों में नहीं बिछाई गई है पेयजल की पाइप लाइन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नगर पालिका में शामिल 18 गांवों सहित शहर की 85 हजार की आबादी को हर माह 60 लाख से अधिक रुपये का पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। इनकी इस मजबूरी की वजह यह है कि नगर पालिका परिषद की पेयजल आपूर्ति की पाइप लाइन इन इलाकों में नहीं बिछाई गई है। वहीं, इन क्षेत्रों में अधिकतर इंडिया मार्क टू हैंडपंप भी खराब पड़े हैं। पालिका की नाकामी की वजह से इतनी बड़ी आबादी को शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा है।
शहर की आबादी करीब डेढ़ लाख है। इसमें किरायेदार सहित 25 हजार परिवार रहते हैं। इतनी आबादी में नगर पालिका ने 1600 लोगों को पानी का कनेक्शन दिया है, जबकि नए क्षेत्रों में कनेक्शन नहीं दिया गया है। शहरी आबादी में करीब 14 हजार परिवार हैंडपंप के पानी से प्यास हैं। करीब दो हजार घरों में सबमर्सिबल लगे हैं। तीन हजार घरों में आरओ लगे हैं।
जल निगम की लैब के असिस्टेंट संजय कुमार ने बताया कि शहर के पानी में आयरन अधिक होता है। मटमैला भी होता है। पहले हुई जांच में एक स्थान के पानी में आर्सेनिक अधिक पाया गया था, जबकि पानी रंगहीन, गंधहीन और स्वादहीन होना चाहिए।
जाहिर है कि शुद्ध पेयजल नहीं मिलने की वजह से लोगों को खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है। यही नहीं जो सक्षम हैं वह आरओ का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इन इलाकों में पहुंची पाइप लाइन
नगर पालिका परिषद में 18 राजस्व ग्राम शामिल किए गए हैं। इन गांवों में शुद्ध पानी की आपूर्ति के लिए पाइप लाइन नहीं डाली गई है। जगदीशपुर कॉलोनी, रेलवे स्टेशन के पास रोवापार, रेहरा, बसडिलिया, मुड़िला, मधुकरपुर, दतरंगवा, सिंहेश्वरीपुरम व थरौली और पकड़ी बाजार के कुछ क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। वहीं, जिन क्षेत्रों में पाइप लाइन में रिसाव होता रहता है, लोग उसका पानी पीने से कतराते हैं।
पानी की कीमत बढ़ी तो लगवाने लगे आरओ
शहर में आरओ एसोसिएशन ने दो माह पहले 20 लीटर पानी की कीमत बढ़ाकर 30 रुपये कर दी। इसके बाद लोगों ने अपने घरों में आरओ लगवाना शुरू कर दिया है। जो लोग पहले महीने में 600 से 800 रुपये पानी पर खर्च करते थे दाम बढ़ने पर उन्हें 900 से 1300 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। दुकानदार राजेश अग्रवाल ने बताया कि पहले माह में 20-25 आरओ बिकते थे। अब 35 से 40 आरओ बिक रहे हैं। जो लोग हर माह पानी पर 1000 से 1500 रुपये खर्च कर रहे हैं, वे 8500 रुपये की मशीन लगाएंगे तो बार-बार बिल चुकाने की दिक्कत दूर हो जाएगी।
इस तरह तैयार हुआ है पानी का बाजार शहर के भू-गर्भ जल विभाग में कोई कर्मचारी तैनात नहीं है इसलिए सभी आरओ वालों का पंजीयन नहीं हुआ है। शहरी क्षेत्र में 12 आरओ प्लांट लगे हैं, जबकि हर प्लांट में 4-5 गाड़ियां पानी भरने और पहुंचाने में लगी हैं। शहर में करीब 600 परिवार पानी खरीदकर पीते हैं। 30 रुपये प्रति जार के अनुसार 54 लाख रुपये से अधिक का पानी बिक जा रहा है। सरकारी व गैर सरकारी कार्यालयों में भी जार का पानी बिक रहा है। होटल व्यवसायी शुभम श्रीवास्तव ने बताया कि होटलों व दुकानों में हर दिन करीब 20 हजार रुपये के बोतल का पानी बिक रहा है। इस प्रकार शहर के लोग 60 लाख रुपये से अधिक का पानी खरीदकर पी रहे हैं।
अधर में पानी पहुंचाने की योजना
नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर ने दतरंगवा में आरओ प्लांट लगाया है। योजना है कि इस प्लांट के माध्यम से निर्धारित शुल्क जमा कराकर घर-घर पानी पहुंचाया जाएगा। साथ ही सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी पानी बेचा जाएगा, लेकिन गाड़ियों के इंतजार में प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया है।
रसोई के बजट में जुड़ा पानी का बिल
नगर पालिका परिषद का पानी भी अधिकतर क्षेत्रों में शुद्ध नहीं पहुंचता है। पुरानी पाइप लाइन में रिसाव होने की वजह से गंदगी घरों में चली जाती है। ऐसे में परिवार की सेहत की चिंता में बाजार से पानी खरीद रही हूं। किचन के बजट में पानी का खर्च भी जोड़ना पड़ता है।
- बबिता तिवारी, परसा
अब तो पानी नहीं खरीदूंगी
परिवार में एक जार पानी में एक दिन का काम नहीं चल पाता है, इसलिए आरओ खरीदने का निर्णय किया है। दो दिन में मशीन लग जाएगी तो पानी की समस्या दूर हो जाएगी। नगर पालिका की आपूर्ति का पानी नहीं पीते हैं, कुछ दिन पहले पाइप लाइन में रिसाव हो गया था तो पीने लायक पानी नहीं आ रहा है।
- गीता देवी, थरौली
वर्जन
जल निगम की योजना से विस्तारित क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू होने वाला है। इसके बाद जरूरतमंदों को पानी का कनेक्शन दिया जाएगा। घर-घर पानी पहुंचाने की योजना पर काम किया जा रहा है, जल्द ही ये सुविधाएं दी जाएंगी।
- मुकेश चौधरी, ईओ नगर पालिका परिषद