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Siddharthnagar News: पुत्र की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा व्रत, की पूजा

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उसका में हल षष्ठी व्रत की कथा सुनती व्रती महिलाएं। संवाद
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शहर समेत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने परंपरागत तरीके से की पूजा
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संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। हलषष्ठी पर्व पर माताओं ने व्रत रखा और पूजा कर पुत्रों के दीर्घायु की कामना की। शहर से गांव तक व्रती महिलाएं सुबह स्नान कर एक जगह एकत्र हुईं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने छठ माता के प्रतीक कुश के पौधों में छह गांठ लगाकर महुआ के छह पत्तों पर तिन्नी का चावल, महुआ व दही आदि रखकर छठ माता को समर्पित किया। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने छठ माता से जुड़े किस्से सुने और सुनाए।
शहर के सिहेंश्वरी मंदिर, हनुमान मंदिर समेत विभिन्न मंदिरों में व्रती महिलाओं ने पूजन किया। इसके साथ उसका, लोटन, बर्डपुर, जोगिया, बांसी, डुमरियागंज व इटवा क्षेत्र व शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में भी पर्व श्रद्धा से मनाया गया। महिलाओं ने व्रत रखकर पुत्र और पति के दीर्घायु की कामना की। पूजा स्थल पर बेदी मनाकर महिलाओं ने छठ माता की पूजा की और कहानी सुनाई। प्रसाद के रूप में महुआ, तिन्नी का चावल और दही चढ़ाया। सुबह से ही घरों में पूजा की तैयारी चल रही थी। थाल में पूजा का सामान लेकर महिलाएं पूजा स्थल पहुंची। छठ माता की पूजा कर पुत्र और पति के दीर्घायु की कामना की। मान्यता के अनुसार छठ माता की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। प्रत्येक वर्ष भादो मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यह व्रत विशेष रूप से पुत्रवती माताओं द्वारा किया जाता है। परंपरा के अनुसार महिलाएं जलाशय अथवा किसी मंदिर परिसर में जलकुंड बनाकर पूजा करती हैं। पलास, कुश आदि की टहनियां भूमि पर खड़ी कर छठ माता की पूजा की जाती है। पंडित राम भेज मिश्रा ने कहा कि आज के दिन भगवान बलराम का जन्म हुआ था। छठ पूजा कथा के अनुसार पुत्रहीन महिला भी पुत्र प्राप्ति के लिए पूजा करती है। शोहरतगढ़ नगर पंचायत सहित गौहनिया, चिल्हिया, बानगंगा, झरूआ, चिल्हिया, खुनुवां, रमवापुर तिवारी, पल्टादेवी, करौती, बेलवा महदेवा, खुरहुरिया, जगरगठिया, संतोरा, संतोरी, बरगदवा सहित आदि गांवो में पूजन को लेकर सुबह से ही गांवों में ही उत्साह देखा गया। तालाब, जलाशयों के किनारे महुआ के पत्ते पर महुआ, दूब, तिन्नी का चावल, हल्दी, भैंस का दूध, दही व घी आदि चढ़ाकर छठ माता की पूजा की गई। सामूहिक रूप से छठ देवी की कथा सुनाई गई। महिलाओं ने दिनभर व्रत रखकर शाम को गांव के मंदिरों में पूजा-अर्चना की। शोहरतगढ़ में व्रती महिलाएओं ने शाम को रामजानकी मंदिर, शिवबाबा मंदिर, डोई मंदिर के मंदिर में पूजन-अर्चन किया और पुत्रों के दीर्घायु की कामना की।
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व्रत में नहीं खाया जाता है जोते हुए खेत का अन्न व सब्जी
डुमरियागंज क्षेत्र के शाहपुर गांव में सुबह बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्र हुईं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। गांव की शकुंतला, रेखा देवी, रानू पांडेय, खुश्बू मोदनवाल, पूनम अग्रहरि, पूजा अग्रहरि और उजाला गुप्ता ने बताया कि इस व्रत में खेतों में उत्पन्न होने वाली किसी भी चीज को ग्रहण नहीं किया जाता। तिन्नी का चावल तालाब में उत्पन्न धान से निकाला जाता है। इसलिए इस व्रत में तिन्नी के चावल का ही प्रयोग किया जाता है। मान्यता है कि तिन छठ माता का पूजन-अर्चन व व्रत करने से संतान दीर्घायु होती है और उसे सुख, शांति तथा समृद्धि मिलती है।
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सुख, समृद्धि की मनोकामना
खेसरहा क्षेत्र के सिसहनिया गांव समेत अन्य कई जगहों पर मंगलवार को महिलाओं ने हलषष्ठी व्रत रखा। साथ ही संतानों की लंबी आयु के लिए भगवान का पूजन किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हलछठी व्रत संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है। कहते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से संतान को संकटों से मुक्ति मिलती है एवं उन्हें लंबी आयु मिलती है। यह पर्व भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार बलराम शेषनाग के अवतार थे। इस दिन हल पूजन का विशेष महत्व है।
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