बेटे ने कहा, गंभीर बीमारियों से ग्रस्त उनके पिता थे बेकसूर
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। एक माह पहले नायब तहसीलदार पर हमले के आरोपी मो. सईद मलिक की मौत के बाद सवाल उठना शुरू हो गया। परिजन ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा है कि गंभीर रूप से बीमार होने के बाद भी उन्हें जेल भेजा गया, जिसके बाद उनकी हालत बिगड़ने लगी और बुधवार की रात मौत हो गई।
बता दें कि 15 दिसंबर को हुए नायब तहसीलदार डुमरियागंज पर जानलेवा हमले के मामले में ग्राम मिश्रौलिया निवासी मो. सईद सईद को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जेल में रहने के दौरान वृद्ध आरोपी मो सईद की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद जेल प्रशासन ने उन्हें 25 दिसंबर को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल काॅलेज में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उन्हें 26 तारीख को गोरखपुर मेडिकल काॅलेज रेफर कर दिया। वहां हालत में में सुधार न होने पर चिकित्सकों ने अगले दिन मेडिकल काॅलेज लखनऊ रेफर कर दिया। किडनी में संक्रमण के चलते मो. सईद की डायलिसिस की जा रही थी लेकिन बुधवार की उनकी मौत हो गई। मौत की खबर से उनके परिजन सहित गांव मिश्रौलिया में शोक की लहर दौड़ गई। उनके बेटे अख्तर मालिक ने अपने पिता की मौत के लिए पुलिस और प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार बताया है।
उन्होंने कहा कि उनके पिता पिछले चार-पांच महीने से किडनी सहित गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। उनका मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ में इलाज चल रहा था। नायब तहसीलदार पर हुए हमले के प्रकरण में बेकसूर होते हुए उनके पिता को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया। उनके पिता मौके पर मौजूद नहीं थे। बेकसूर थे, लेकिन उन्हें आरोपी बनाकर जेल भेज दिया उनके प्रति कोई हमदर्दी नहीं बरती गई जबकि उन्होंने पुलिस को अपनी बीमारी और डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट को भी दिखाई थी।
यह था मामला
14 दिसंबर को डुमरियागंज के नायब तहसीलदार महबूब आलम घटना के दिन मिट्टी खनन की जांच करने भवानीगंज थाना क्षेत्र के बनगवा नानकार गए थे। जेसीबी को कब्जे में लेने के दौरा नायब तहसीलदार पर हमला हुआ और इस मामले में भवानीगंज थाना पुलिस ने मो. सईद को एक अन्य आरोपी के साथ 16 दिसंबर को गिरफ्तार कर जेल भेजा दिया था।