तीन दिन से लापता वृद्धा की बाग में मिली लाश
- उसका थाना क्षेत्र के तेतरी गांव का है मामला
-मौत कैसे हुई, इसकी जांच में जुटी है पुलिस
उसका बाजार(सिद्धार्थनगर)। थाना क्षेत्र के तेतरी स्थित प्राथमिक विद्यालय के पास बृहस्पतिवार को एक 60 वर्षीय महिला की लाश मिली। वह तीन दिन से लापता थी। मौत का कारण जानने के लिए पुलिस शव का पोस्टमार्टम करा रही है।
महराजगंज के बृजमनगंज थाना क्षेत्र स्थित धानी बाजार गांव निवासी स्वर्णरेखा (60) थीं। वह सिद्धार्थनगर जिले के उसका बाजार थाना क्षेत्र के तेतरी गांव में अपनी बहन अन्नपूर्णा पत्नी साधुशरण यादव के घर लगभग एक वर्ष से रह रही थीं। परिवार के मुताबिक वह 11 जुलाई की रात घर से गायब थीं। बृहस्पतिवार सुबह गांव के प्राथमिक विद्यालय के पास बाग में उसकी लाश मिली। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साधुशरण के मुताबिक मृतका स्वर्णरेखा पत्नी राम अवतार 11 जुलाई की रात लगभग दस बजे गांव के बगल स्थित बगीचे में आम बीनने गई थीं। काफी समय बाद जब वह नहीं लौटी तो परिजन खोजने निकले, लेकिन निराशा हाथ लगी। अगले दिन भी लोगों ने काफी खोजबीन की, लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला। थक हार कर साधुशरण ने बुधवार को उक्त महिला के गुमशुदा होने की सूचना पुलिस की दी। बृहस्पतिवार सुबह जब स्कूल खुला तो दुर्गंध के कारण स्कूल संचालन में दिक्कत होने लगी। शिक्षक और बच्चे भयंकर दुर्गंध से परेशान हो गए। विद्यालय की रसोइया काला देवी दुर्गंध वाली जगह पर पहुंची तो वहां महिला की लाश देख सन्न रह गई। उसके मुंह पर कपड़ा लपेटा हुआ था और आधी लाश सड़ चुकी थी। सूचना पर साधुशरण और अन्नपूर्णा भी वहां पहुंचे और लाश की पहचान स्वर्णरेखा के रूप में की। मौके पर सीओ सदर प्रदीप कुमार यादव ने पहुंचकर जानकारी ली। इस संबंध में एसओ अभिषेक सिंह ने बताया कि साधुशरण ने लिखित सूचना दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अपना घर छोड़कर रहती थी बहन के घर
मृतका स्वर्णरेखा के पति राम अवतार अपने दोनों अविवाहित बेटों के साथ पंजाब में रहकर कमाते हैं। जबकि दो बेटियां शादी के बाद अपनी ससुराल रह रही हैं। अकेलेपन के कारण वह तेतरी स्थित अपने बहन के घर पर एक वर्ष से रह रही थीं। स्वर्णरेखा के मौत की जानकारी होते ही परिजन यहां पहुंचने लगे हैं।
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घटना हुई या दुर्घटना, समझ से परे
स्वर्णरेखा की मौत क्यों, कैसे और कब हुई इसका सही पता नहीं चल रहा है। उसकी आधी लाश सड़ चुकी है, जिससे लगता है कि उसकी मौत 11 जुलाई की रात में ही हो गई थी। मुंह साड़ी से ढका हुआ था और लाश से कुछ दूरी पर उसका टॉर्च भी मिला है। लाश मिलने वाली जगह के ठीक बगल में ट्रांसफार्मर लगा है, जो आबादी से लगभग सौ मीटर दूर है। यहां घने झाड़, झुरमुट और भिलोर के पेड़ हैं। वह घने झुरमुटों के बीच कैसी पहुंची, जहां दिन में जाने पर ही डर लगता है। यह बात घटना की ओर इशारा कर रही है। दूसरी ओर अगर वह किसी दुर्घटना की शिकार हुई है तो उसके कुछ साक्ष्य जरूर मिलते। परिजन बताते हैं कि वह खुशहाल थी। अक्सर आम बीनने के लिए बगीचे में टॉर्च लेकर जाया करती थीं। 11 की रात में भी आम बीनने को कह घर से निकलीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं।