माइक्रो बॉयोलॉजी लैब अधूरा, प्रैक्टिकल में हो सकती है असुविधा
- सेंट्रल लैब में नहीं आईं सभी मशीनें, जगह का भी है अभाव
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल के सेंट्रल लैब में माइक्रो बॉयोलॉजी का लैब अधूरा है। इस कारण मेडिकल कॉलेज के छात्र-छात्राओं के प्रैक्टिकल में भी समस्या आ सकती है। सेंट्रल लैब में अब तक कई मशीनें नहीं आई हैं। यहां जगह का भी अभाव है।
संयुक्त जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद पैथोलॉजी को सेंट्रल लैब में विकसित किया जा रहा है। लैब में पैथोलॉजी, बॉयो कमेस्ट्री व माइक्रो बॉयोलॉजी से संबंधित जांचें हो रही हैं। पैथोलॉजी में ही तीनों विभागों की लैब होने के कारण जगह की कमी आ रही है, जबकि माइक्रो बॉयोलॉजी की मशीनें भी नहीं मिल पाई हैं।
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राएं द्वितीय वर्ष में प्रवेश करेंगे तो लैब में प्रैक्टिकल की आवश्यकता पड़ेगी। जनवरी 2023 तक प्रथम सत्र संचालित होने की संभावना है। सेंट्रल लैब का विस्तार नहीं हुआ तो उन्हें प्रैक्टिकल करने में समस्या उत्पन्न हो सकती है।
नहीं हो रहा है कल्चर टेस्ट
माइक्रो बॉयोलॉजी लैब से संबंधित सेंट्रल लैब में माइक्रो बॉयोलॉजी से संबंधित रूटीन माइक्रोस्कोपी जांच हो रही है। कल्चर जांच नहीं हो रही है। इनमें ब्लड, यूरिन व पश कल्चर होता है। मरीजों को कल्चर जांच की आवश्यकता पड़ती है तो उन्हें बाहर से जांच करानी पड़ती है। कल्चर जांच के लिए छह से नौ सौ रुपये खर्च होते हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 15 मरीजों को कल्चर जांच के लिए निजी पैथोलॉजी सेंटर में जाना पड़ता है।
सेंट्रल लैब में माइक्रो बॉयोलॉजी की जांच शुरू होने में तीन माह लग सकता है। सेंट्रल लैब के लिए जगह बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मशीनें आने के बाद जांच शुरू होगी। ये जांचे एमबीबीएस द्वितीय बैच का सत्र शुरू होने से पहले शुरू हो जाएंगी।
- डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज