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Siddharthnagar News: जनसंख्या नियंत्रण में पुरुष पीछे, महिलाएं दिखा रहीं रुचि

Wed, 28 Feb 2024 02:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। जनसंख्या नियंत्रण के तमाम जागरूकता के बाद भी समाज को सीख देने वाले पुरुष महिलाओं से पीछे हैं। भनवापुर और डुमरियागंज में वर्ष 2022-23 में 245 ने नसबंदी कराई है। इसमें 243 महिला और पुरुषों की संख्या महज दो है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि नसबंदी से आज भी पुरुषों में डर बना हुआ है।
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जनसंख्या को नियंत्रित करने के लिए सरकार लोगों को जागरूक कर रही है। कई प्रकार की सुविधाएं और प्रोत्साहन राशि दे रही है। इससे लोग परिवार नियोजन पर जोर दें। महिलाएं तो इस बात को समझ चुकी हैं। लेकिन सब जानते हुए पुरुष पीछे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक पुरुषों में भ्रांति है कि नसबंदी से शारीरिक संबंध बनाने की क्षमता कम हो जाती है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की नसबंदी आसान है। सप्ताह भर तक वे भारी सामान नहीं उठा सकते। इसके बाद सब सामान्य हो जाता है। लेकिन पुरुषों में जागरूकता नहीं आई। वे अब भी डरते हैं। उन्होंने ने बताया कि परिवार नियोजन का स्थायी साधन नसबंदी एक सरल उपाय है। वर्ष 2022-23 में भनवापुर में 106 महिलाएं तो सिर्फ दो पुरुषों ने नसबंदी कराई है। जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेंवा में 82 और अप्रैल 2023 से लेकर अब तक 55, कुल 137 महिलाओं ने नसबंदी करवाया है ।

पुरुषों को प्रोत्साहन राशि ज्यादा

परिवार नियोजन के लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। नसबंदी कराने वाली महिलाओं को दो हजार रुपये दिए जाते हैं। इसके अलावा प्रसव के तुरंत बाद नसबंदी पर महिलाओं को ढाई हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है। पुरुषों की नसबंदी कराने पर प्रोत्साहन राशि तीन हजार रुपये दिए जाते हैं।
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पुरुष नसबंदी के फेल होने का डर न के बराबर

पुरुष नसबंदी के फेल होने का डर एक प्रतिशत है। शादीशुदा पुरुष नसबंदी की सेवा का लाभ ले सकते हैं। 60 वर्ष से कम उम्र के शादीशुदा पुरुष भी नसबंदी करा सकते हैं। पुरुषों को नसबंदी तभी करवानी चाहिए, जब पत्नी ने नसबंदी न करवाई हो। पुरुष नसबंदी के फेल होने का डर एक प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि छोटे परिवार के लिए महिलाओं ने प्रसव के तत्काल बाद आईयूसीडी कॉपर टी का सहारा लिया है।

-डॉ. श्रवण कुमार तिवारी, सीएचसी अधीक्षक बेंवा

ध्यान दें, अगर बच्चे की जरूरत होती है तो ऑपरेशन कर खोल दिया जाता है नस

एक छोटा सा चीरा लगाकर नसबंदी की जाती है, जबकि महिलाओं में भी छोटा चीरा कर पेट खोलना पड़ता है। पुरुष नसबंदी में पांच से सात मिनट का समय लगता है, महिलाओं में 20 से 25 मिनट लगता है। नसबंदी कराने वाले पुरुष हों या फिर महिलाओं को यदि बच्चे की जरूरत होती है तो ऑपरेशन कर नस को खोल दिया जाता है। महिला चाहे तो फिर से गर्भ धारण कर सकती हैं।
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-डॉ. शैलेंद्र मणि ओझा, सीएचसी अधीक्षक सिरसिया
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