मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में एक ही बेड पर भर्ती दो बच्चे।
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में गर्मी के मौसम में बच्चों वार्ड फुल हो गए है। एक ही बेड पर दो-दो बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों की संख्या कम होने से इलाज प्रभावित हो रहा है। आठ डॉक्टर होने चाहिए, जबकि तीन डॉक्टरों के भरोसे ही इलाज हो रहा है। कई बार ऐसी स्थिति आ रही है कि जब गंभीर नवजात को लेकर उनकी मां पहुंचती है तो सीनियर डॉक्टर को बुलाया जाता है, जबकि एसएनसीयू व पीआईसीयू में सीनियर डॉक्टर की ड्यूटी 24 घंटे होनी चाहिए।
डॉक्टरों के अनुसार अधिक गर्मी में बच्चे उल्टी दस्त से बीमार हो रहे हैं। रविवार को एसएनसीयू के 20 बेड पर 27 बच्चों को भर्ती किया गया था, जबकि 15 बेड का पीआईसीयू में भी लगभग सभी बेड पर बच्चे भर्ती किए गए थे। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के दो पद एवं एनएचएम में पांच पद रिक्त हैं। सीनियर डॉ. एसएल पटेल ओपीडी,वार्ड, इमरजेंसी एवं पोस्टमार्टम ड्यूटी की ड्यूूटी भी करते हैं। यहीं कारण है कि एसएनसीयू में गंभीर रूप से बीमार नवजात आते हैं तो उन्हें बुलाया जाता है। एनएचएम के अंतर्गत नियुक्ति डॉ. फजल खान को एमसीएच विंग के पीडियाट्रिक वार्ड में भेजा गया है। इसी प्रकार सीनियर रेजीडेंट डॉ. शालिनी पांडेय भी पीआईसीयू में ड्यूटी कर रही है। इनके अलावा दो जूनियर रेजीडेंट की ड्यूटी लगाई गई है ताकि इलाज होता रहे।
इस मामले में प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि डॉक्टरों के नियुक्ति की कोशिश की जा रही है। डॉ. फजल खान की नियुक्ति महिला अस्पताल में हैं, इस कारण उन्हें एमसीएच विंग में भेजा गया है। डॉक्टरों की ड्यूटी इस तरह लगाई जा रही है कि बच्चों का इलाज होता रहे।
मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में मेरा बच्चा भर्ती है। सीनियर डॉक्टर कभी कभी आते हैं। सात दिन से इलाज हो रहा है, लेकिन चिंता बनी हुई है। सरकारी अस्पताल है, यहां डॉक्टर हर समय होने चाहिए।
सुनीता, इटवा
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तीन दिन से मेरा बच्चा एसएनसीयू में भर्ती है। गंभीर था, इसलिए डॉक्टर ने भर्ती कर लिया। सुन रहा हूं कि जूनियर डॉक्टर ही देख रहे हैं। सभी लोग आपस में डॉक्टरों की कमी की चर्चा कर रहे हैं। अब तो हमारे में वश में कुछ नहीं है।
वकील, चिल्हिया
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