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Siddharthnagar News: मरीज माफिया के गठजोड़ से हुई तनातनी, एक काॅल पर पहुंचे 100 मेडिकल छात्र

Thu, 11 Jan 2024 01:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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मेडिकल कॉलेज के गेट पर तैनात पुलिस कमीै।
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में मरीज माफिया की गठजोड़ के कारण जूनियर डॉक्टरों व आउट सोर्स कर्मियों में पहले से ही तनातनी थी। यही कारण था कि सोमवार रात 11:30 बजे एक कॉल पर हॉस्टल से 100 से अधिक मेडिकल छात्र पहुंच गए और मारपीट, तोड़फाड़ की घटना हुई। मेडिकल कॉलेज में निजी अस्पतालों की दखल का नतीजा था कि मरीजों का सौदा करने में संलिप्त कुछ आउटसोर्स कर्मी भी लामबंद थे। दोनों पक्ष आमने सामने हुए तो इस घटना ने बड़ा रूप ले लिया।
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मेडिकल कॉलेज में यह पहली घटना है, जिसमें मारपीट करने के लिए मेडिकल छात्र हॉस्टल से बाहर निकले हैं, जबकि मनमानी बढ़ने का नतीजा ऐसा था कि जिसकी ड्यूटी नहीं होती थी, वह आउटसोर्स कर्मी भी अस्पताल में जमा रहता था। इस गठजोड़ के कारण बाहरी तत्व भी मेडिकल कॉलेज में अंगद के पांव की तरह जमे हुए थे। हालांकि, बुधवार को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी का नजारा अलग दिखा। बिना ड्यूटी के इमरजेंसी डॉक्टरों की कुर्सी पर जमें बाहरी तत्व नहीं दिखे।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड सोमवार रात वृद्ध मां का इलाज कराने पहुंचे नगर से सटे बसडिलिया गांव निवासी राजन पांडेय और ड्यूटी पर तैनाज जूनियर रेजिडेंट कृष्णनंद पासवान के बीच कहासुनी के बीच जमकर मारपीट हुई। आउटसोर्स और नियमित कर्मियों को चोट आई। हालांकि, कोई खुलकर आगे नहीं आया कि उन्हें चोट लगी है। दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, लेकिन इस विवाद की नींव पहले ही पड़ चुकी थी। इमरजेंसी में एक स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि रात में काली कमाई के खेल में आउट सोर्स कर्मी और कुछ जूनियर डॉक्टरों का अलग-अलग ग्रुप है, जो रात में मरीजों को जबरिया दवा लिखने से लेकर उन्हें दूसरे अस्पतालों पर गुमराह करके भेजने का कार्य करता है। इसमें बाहरी लोगों के कब्जे में पूरी इमरजेंसी हो जाती थी, क्योंकि जांच करने वाले अधिकारी ही उदासीन थे।
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विवाद हुआ तो बाहर हो गए बाहरी

मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में अक्सर बाहरी लोग भी बैठे दिख जाते थे, लेकिन बुधवार को वे लोग ही दिखे, जिनकी ड्यूटी थी। ये मरीज माफिया और डॉक्टरों-कर्मचारियों के बीच कड़ी बने हुए हैं। रात में मरीज को निजी अस्पताल भेजने से लेकर दवा और जांच लिखवाने का खेल होता है। हालांकि, एप्रन और आईकार्ड नहीं लगाने के कारण डॉक्टर, कर्मचारी और बाहरी में अब भी अंतर कर पाना मुश्किल काम है।
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मरीज माफिया से दब जाते हैं डॉक्टर

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक डॉक्टर ने बताया कि रात ड्यूटी करना कठिन लगता है। जिस दिन ड्यूटी लगती है, उस दिन डर बना रहता है कि कहीं विवाद न हो जाए। किसी मरीज को कुछ न हो जाए। कारण आठ बजे के बाद बाहरी लोग सक्रिय हो जाते हैं। इसमें कुछ कर्मी भी शामिल रहते हैं, जो बिना कहे दूसरी दवा लिखने के लिए दबाव बनाते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि जो मरीज ठीक होने वाला रहता है, उसे भी गुमराह करके निजी अस्पताल में भेज देते हैं। अगर विरोध करें तो यह लोग कुछ भी कर सकते हैंं। कई बार बवाल पर उतारू हो जाते हैं।

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पर्चा भरने और वार्ड में शिफ्ट करने का भी लेते हैं रुपये

विवाद के बाद इमरजेंसी में क्या चलता है, इसकी पोल लगातार खुल रही है। एक स्वास्थ्य कर्मी ने बताया कि साहब यहां बड़ी अंधेरगर्दी है। कई बार ऐसा होता है कि इमरजेंसी पर्चा भरने का रुपया ले लिया जाता है। वार्ड में बेहतर सुविधाएं दिलाने के रुपये ले लेते हैं। इसमें भी चेहरा देखकर काम होता है। जिस जानते हैं भारी पड़ेगा और विरोध करेगा, उससे डिमांड नहीं करते हैं। बाकी लोगों के साथ ऐसा ही होता है।

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लाइव चलता है कैमरा, नहीं होती है रिकार्डिंग

मेडिकल कॉलेज में लगे सीसी कैमरे एनएमसी की ओर से संचालित होता है। जो लाइव चलता है। इसमें रिकार्डिंग नहीं होती है। इसलिए मेडिकल कॉलेज में होने वाली घटनाओं की अगर सही जानकारी लेनी हो तो वह नहीं मिल पाती है। जबकि यहां पर अकसर विवाद होता है। अगर फुटेज रहे तो विवाद की मूल वजह की जानकारी सामने आएगी और कार्रवाई सही हो सकेगी

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जिस मरीज को लाया गया था। उसका ब्लड प्रेशर और हिस्ट्री स्टाफ ने लिखा था। उसी के आधार पर दवा लिख रहे थे, तभी रज्जन पांडेय भड़क गए और दूसरी दवा देने और बिना देखे दवा लिखने को लेकर गाली देने लगे। वह नशे में थे, इसलिए गार्ड को बुलाकर बाहर भेजने के लिए कहा गया। गार्ड से भीड़ और खुद मैं बचा नहीं होता तो हमें मार देते। यह देख दवा कराने के लिए पहुंचे एक मेडिकल छात्र ने प्रतिक्रिया व्यक्त की तो उससे भी लड़ने लगे। कब और कैसे छात्र पहुंच गए पता नहीं चला। इसमें मेरी ओर से कोई गलती नहीं की गई है।

-कृष्णानंद, जूनियर रेजीडेंट
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मां का इलाज कराने के लिए गए थे। शुगर बढ़ा हुआ था। इंजेक्शन देने की बात पर डॉक्टर भड़क गए और मेडिकल छात्रों को बुला लिए और उन्होंने बेहरमी से पीटा, गाड़ी का शीशा तोड़ दिया। साथ में गई बहन को भी मार पीट दिया।

-राजन पांडेय, पीड़ित
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हड़ताल की तैयारी में डॉक्टर

मेडिकल कॉलेज में विवाद और जूनियर रेजीडेंट के हटाए जाने के बाद डॉक्टर आक्रोशित हैं। वह संयुक्त रूप से बुधवार को हड़ताल पर जाने वाले थे, लेकिन प्राचार्य डॉ. एके झा के हस्तक्षेप करने और समझाने के बाद डॉक्टर मान गए, लेकिन बृहस्पतिवार को हड़ताल कर सकते हैं।

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मेडिकल कॉलेज में हुए विवाद के मामले में दो जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मेडिकल छात्रों को अनुशासन बनाए रखने की चेतावनी दी गई है। मेडिकल कॉलेज में नियमित जांच हो रही है। बाहरी लोग बिना किसी काम के अस्पताल में मिलेंगे तो कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य
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