-भारत-नेपाल सीमा क्षेत्रों में मानव तस्करी से बचने के लिए बताए उपाय
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सीमा से सटे अठकोनियां गांव में सोमवार को प्राथमिक विद्यालय में मानव तस्करी व मादक पदार्थो की रोकथाम और सीमा क्षेत्र में सुरक्षात्मक उपाय विषय पर लोगों को जागरुक किया गया। मानव तस्करी रोकने के लिए जागरुक किया। एएचटीयू प्रभारी निरीक्षक राम कृपाल शुक्ल ने कहा कि किसी व्यक्ति को डराकर, बल पूर्वक दोषपूर्ण तरीके से कोई काम करवाना, एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने या बंधक बनाकर रखना मानव तस्करी कहलाता है। मानव तस्करी में महिलाएं व लड़कियां सबसे ज्यादा असुरक्षित है। उनकी तस्करी यौन शोषण के लिए की जाती है। गांवों में गरीबी और अशिक्षा, बंधुआ मजदूरी, देह व्यापार, सामाजिक असमानता, क्षेत्रीय लैंगिक असंतुलन, बेहतर जीवन की लालसा, सामाजिक सुरक्षा की चिंता मानव तस्करी के तमाम कारक है।
चौकी इंचार्ज खुनुवां बृजेश सिंह ने कहा कि भारत नेपाल सीमा से होकर मादक पदार्थ व नशीली दवाओं की तस्करी अब लाइलाज बीमारी बन गई है। घर के लोगों को नशे का समाज व परिवार पर क्या असर पड़ता हैए युवाओं से खुलकर बात करनी चाहिए। यदि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे तत्व सामने आते हैं जो महिलाओं व बच्चों को लालच देकर बड़े शहरों में ले जाने का प्रयास करते हैं। तो इसकी सूचना मानव तस्करी निरोधक दस्ता या स्थानीय पुलिस को दें। इस अवसर पर बहरैची बाबा, आरक्षी जालंधर प्रसाद, सुनील कुमार, सरोजा देवी, विजय शंकर, आदित्य प्रकाश मिश्र, कलावती, इंद्रावती, राजाराम आदि मौजूद रहे।