बर्डपुर क्षेत्र में 20 हजार हेक्टेयर में स्थित 10 सागर का होगा पर्यटकीय विकास
जल संरक्षण व सिंचाई सुविधा भी होगी विकसित, विभागीय कार्ययोजना की डीएम ने की समीक्षा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नेपाल सीमा पर बर्डपुर क्षेत्र में 20 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में स्थित 10 सागरों के दिन बहुरने वाले है। पहले चरण में इनमें पांच सागरों पर जल संरक्षण व सिंचाई सुविधा के साथ पर्यटकीय सुविधाओं का विकास होगा। इससे जिले के लोगों सहित बुद्ध स्थली पर आने वाले विदेशी पर्यटक इन सागरों पर नैनीताल के झील की तरह आनंद उठा सकेंगे। सिंचाई विभाग की तरफ से इस संबंध में तैयार की गई कार्ययोजना का शुक्रवार को डीएम डॉ. राजागणपति आर ने समीक्षा किया।
आठ दशक पहले अंग्रेजी हुकूमत में बर्डपुर व शोहरतगढ़ क्षेत्र में नेपाल के पहाड़ों से आने वाले पानी को संग्रहित कर सिंचाई के लिए 10 सागरों का निर्माण कराया था। निर्माण के बाद 2.85 लाख क्यूबिक (घन मीटर) क्षमता वाले इन सागरों से आसपास के 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल के खेतों की सिंचाई होती थी। इन सागरों से निकलने वाली 243 किमी लंबी 40 नहरों से बर्डपुर और शोहरतगढ़ क्षेत्र के सैंकड़ों गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलती रही। वर्तमान में सिल्ट सफाई नहीं होने से इन सागरों की जल संग्रहण क्षमता 1.40 लाख क्यूबिक से भी कम हो गई है। जिससे इन सागरों से निकलने वाली नहरों में पानी कम पहुंचने से इनकी सिंचाई क्षमता 10 हजार हेक्टेयर के आसपास हो गई है। डीएम डॉ. राजागणपति आर ने सागरों का निरीक्षण कर सिंचाई विभाग को सिल्ट सफाई कर यहां पर्यटकीय सुविधाएं विकसित करने का निर्देश दिया था। जिसके बाद विभाग ने यहां जल संरक्षण व सिंचाई व्यवस्था समेत पर्यटकीय सुविधा विकसित करने की कार्ययोजना तैयार की है।
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इन सागरों का विकास, होगा नौकायन
सिंचाई विभाग की तरफ से बजहा सागर, मोती सागर, सेमरा, मसई और सिसवा सागर की सिल्ट सफाई कर नौकायन समेत विभिन्न सुविधाओं के विकास की कार्ययोजना तैयार की गई है। सभी 10 सागरों में सबसे अधिक जल संग्रहण क्षमता मसौली सागर की 58400 क्यूबिक (घन मीटर) और बजहा सागर की 51760 क्यूबिक रही। सेमरा सागर की क्षमता 21400 क्यूबिक, मसई सागर 29960 क्यूबिक, मसई सागर 17120 क्यूबिक, मोती सागर 19560 क्यूबिक, बटुआ सागर 12840 क्यबिक, सिसवा सागर 34240 क्यूबिक, शिवति सागर 12840 क्यूबिक और मर्सी सागर की क्षमता 26680 क्यूबिक है। वर्तमान में सिल्ट से उथला होने के कारण इन सागरों की जल संग्रहण क्षमता आधे से भी कम हो चुकी है।
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सागरों पर विकसित होगा इको टूरिज्म
जल संचयन के लिए बने सागरों पर इको टूरिज्म की तर्ज पर पर्यटकीय सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
सागरों की सिल्ट सफाई कराने के साथ किनारे पाथ वे निर्माण, बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था की जानी है। साथ ही यहां पर वेडिंग जोन बनाया जाएगा। विभाग की तरफ से यहां के सौंदर्यीकरण, वॉच टावर एवं लाइटिंग आदि लगाने के साथ ही छाए के लिए पौधरोपण भी किया जाएगा। लोगों के ठहरने की सुविधा, पीने के लिए शुद्ध पानी की उपलब्धता एवं सामुदायिक शौचालय का निर्माण भी कार्ययोजना में शामिल है। यहां पर दुकानों एवं बैठने के लिए बेंच समेत विभिन्न सुविधाओं के निर्माण में लकड़ी का प्रयोग किया जाएगा। जिससे पर्यावरण प्रदूषण से बचा जा सकेगा और इको टूरिज्म के माध्यम से पर्यटकों को लुभाया जाएगा।
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विभाग ने कार्ययोजना किया प्रस्तुत
सिद्धार्थनगर। कलक्ट्रेट सभागार में डीएम डॉ. राजागणपति आर की मौजूदगी में सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने सागरों के पर्यटकीय विकास के संबंध में तैयार की गयी कार्ययोजना की प्रस्तुति की। इसमें बर्डपुर क्षेत्र में स्थित 10 सागरों में पांच सागरों पर जल संरक्षण व सिंचाई सुविधा समेत पर्यटकीय सुविधाएं विकसित करने संबंधी पीपीटी प्रदर्शित करते हुए कार्ययोजना की जानकारी दी गई। इस दौरान एई वैभव पांडेय मौजूद रहे। संवाद