हत्या में चाचा को आजीवन कारावास
न्यायालय अपर सत्र एवं न्यायाधीश बांसी ने सुनाया फैसला
बांसी। इकलौते बालक की गर्दन काटकर नदी में फेंक देने के पांच वर्ष पुराने मामले में चाचा को शनिवार को सजा सुनाई गई। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश बांसी मो. सफीक ने आजीवन कारावास और 75 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ईश्वरचंद दुबे ने बताया कि 23 अप्रैल 2017 को खेसरहा थाना क्षेत्र के ग्राम करमडीह जमुआर निवासी छोटे लाल के दस वर्षीय इकलौते पुत्र सागर की हत्या हो गई थी। उसका गर्दन काटकर शव कपिया गांव के समीप से आमी नदी के तट पर मिला था। पिता ने उसी दिन अपने भाई अनिल कुमार चौधरी पर हत्या का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी थी। पुलिस ने हत्या का मुकदमा पंजीकृत आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत की थी।
शनिवार को न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से नौ साक्षी पेश किए गए। इसमें अनिल चौधरी को दोषी पाया गया। न्यायाधीश ने उसे 75 हजार अर्थदंड सहित आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अर्थदंड की धनराशि में से 50 हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति मृतक के माता-पिता को देने का आदेश भी न्यायालय ने दिया है। अभियोजन पक्ष की पैरवी अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ईश्वर चंद्र दूबे ने की।