देवरिया जनपद में भूमि विवाद के बाद डीएम और एसपी ने मातहतों को किया अलर्ट
मामला आने के बाद तत्काल करें जांच, जिससे न हो बड़ा विवाद
जिले के तहसील न्यायालयों मेें लंबित है भूमि विवाद के चार हजार से अधिक मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भूमि के लिए देवरिया जनपद में हुए नरसंहार को देखते हुए जिले के डीएम और एसपी अलर्ट हैं। दोनों अधिकारियों ने मातहतों को निर्देश दिए हैं कि भूमि विवाद से संबंधित मामला सामने आने के बाद तत्काल जांच करें और अवगत कराते हुए निस्तारण कराएं। ताकि विवाद होने से रोका जा सके। लेकिन हर गांव में पनप रहे भूमि विवाद को कैसे प्रशासन रोकेगा। न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण के लिए कोई मास्टर प्लान नहीं है। जबकि जनपद के तहसील न्यायालय में लगभग चार हजार भूमि विवाद के मामले चल रहे हैं। इसमें अधिकांश स्थानों पर हर साल कब्जे को लेकर तकरार होती रहती है। ऐसे में देवरिया जैसी घटना होने से यहां भी इन्कार नहीं किया जा सकता है।
जर, जोरू और जमीन इसके लिए कोई भी व्यक्ति किसी भी हद तक जा सकता है। जैसा कि पूर्व में होता चला आ रहा है। मौजूदा समय में जमीन भूख बढ़ रही है। जमीन के एक टुकड़े के लिए लोग एक-दूसरे का खून बहाने से नहीं चूक रहे हैं। जमीन में अकूत रुपये देखकर माफिया से लोग भू-माफिया बन गए हैं।
हाल यह कि कहीं-कहीं उनके इशारे के बिना भूमि की बिक्री और कब्जा नहीं होता है। उनकी मर्जी से खरीद-फरोख्त नहीं हुई तो कोई न कोई अड़ंगा जरूर खड़ा होता है। यह बड़े विवाद को जन्म देता है। इसमें खून खराब के अलावा जाने भी जाती हैं। जैसा कि देवरिया जनपद में अभी दो दिन पहले हुआ है।
इस घटना को देखने के बाद जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने अपने- अपने मातहतों को निर्देश दिए हैं कि अगर भूमि विवाद से जुड़ा हुआ कोई मामला सामने आता है तो तत्काल रिपोर्ट देने के साथ ही मौके की हकीकत जानें। अगर विवाद होने की आशंका दिखे तो कार्रवाई करें। साथ ही साथ प्रयास करें कि मामला निपट जाए। लेकिन अधिकारियों की मंशा कितनी कामयाब होगी, यह बड़ा सवाल है।
कारण यह कि तहसील न्यायालयों में भूमि विवाद के लगभग चार हजार मामले लंबित हैं। इनमें अधिकांश स्थानों पर हर साल जबरिया कब्जा करने को लेकर मारपीट की नौबत आती है। इससे कैसे प्रशासन निपटेगा यह किसी चुनौती से कम नहीं है।
हर गांव में पनप रहा है भूमि विवाद
जिले की चार तहसीलों से मिले भूमि विवाद के आंकड़ों पर गौर करें तो इटवा को छोड़कर चार तहसीलों में मौजूदा समय में भूमि से जुड़े विवाद के 3458 मामले लंबित हैं। अन्य तहसीलों के मुकदमों की संख्या को देखा जाए तो इटवा को लेकर चार हजार केस हो जाएंगे। हालांकि, वहां से रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। जिले में कुल 1136 ग्राम पंचायतें हैं। ऐसे में अगर देखें तो कोई गांव नहीं बचा है, जहां पर एक या दो केस भूमि विवाद का न हो। मिले आंकड़ों के मुताबिक, शोहरतगढ़ तहसील में 1242, बांसी में 1278, डुमरियागंज में 350 और नौगढ़ तहसील में 588 मामले भूमि विवाद से जुुड़े लंबित हैं, जो चल रहे हैं।
बोले जिम्मेदार
देवरिया की घटना को देखते हुए भूमि विवाद के मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए निस्तारण करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। साथ ही तहसील न्यायालय को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि जितनी तेजी से विवाद के मामले आ रहे हैं, उससे अधिक तेजी से मामलों का निस्तारण किया जाए।
-पवन कुमार अग्रवाल, जिलाधिकारी
ऐसे कम होंगे भूमि विवाद के मामले
जमीन के विवाद में मास्टर प्लान तैयार करना चाहिए ताकि जानलेवा घटनाएं न हों। यदि किसी ने एक ही जमीन की कई बार रजिस्ट्री की हो तो उसे जेल भेजा जाना चाहिए। वरासत, पैमाइश सहित अन्य आपत्तियों का तेजी से निस्तारण किया जाना चाहिए। जमीन विवाद के मामले में अधिकारियों-कर्मचरियों की जिम्मेदारी तय है। लापरवाही के मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
-गिरिजा रमण त्रिपाठी, अधिवक्ता
भूमि विवाद से जुड़े मामले सामने आने के बाद तत्काल राजस्व विभाग को अवगत कराते हुए उनके अनुसार निस्तारण करने के निर्देश थानाध्यक्षों को दिए गए हैं। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि इस प्रकार के मामले में विवाद होने पर तत्काल कार्रवाई करते हुए अवगत कराया जाए।
-अभिषेक कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर