स्टेडियम बनने के बाद अभी तक नहीं नियुक्त हुए हाकी के कोच
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एक तरफ जहां शासन खेल को लेकर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं दूसरी तरफ खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षकों की तैनाती नहीं की जा रही है। जिले के युवा भी हॉकी के खेल में हाथ आजमाना चाहते हैं। वह भी हाकी के बड़ा खिलाड़ी बनना चाहते हैं, लेकिन उनकी अभ्यास पर ध्यान देकर उन्हें सही मार्गदर्शन देने वाला कोच ही जिले में नहीं है।
जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम में अभी तक हॉकी का प्रशिक्षक की नियुक्ति नहीं हो पाई है। जबकि जिले के विद्यालयों में भी हॉकी नहीं खेली जाती है। इसका कारण है कि हॉकी का स्टेडियम में कोई कोच ही नहीं है। हॉकी का कोच न होने के कारण स्टेडियम में हॉकी ग्राउंड भी नहीं है। जबकि पिछले कई सालों से स्टेडियम में हॉकी खेलने के लिए स्थानीय खिलाड़ी भी नहीं आते हैं। इससे हॉकी का खेल जिले में दम तोड़ता जा रहा है। हॉकी की खेलकूद प्रतियोगिताओं के आयोजन को लेकर जिले में खाना पूरी की जाती है। मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस व विभिन्न अवसरों पर आयोजित होने वाली हॉकी प्रतियोगिताओं में टीम तक नहीं पहुंचती है। जिसमें अन्य खेलों का आयोजन करा दिया जाता है।
हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है। इसके बावजूद खेल के प्रशिक्षण के लिए कोच की व्यवस्था नहीं है। यह बहुत ही चिंता का विषय है। कोच मिले तो निश्चित ही जिले से प्रतिभाएं निकलें।
कृष, खिलाड़ी
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हॉकी अब कहने मात्र के लिए राष्ट्रीय खेल रह गया है। राष्ट्रीय खेल की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। यदि यही हाल रहा तो जिले से हॉकी का नामोनिशान मिट जाएगा।
अमजद, खिलाड़ी
कोच की नियुक्ति के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही कई खेलों के कोच मिल जाएंगे। हाकी की कोच की नियुक्ति के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा।
-आशुतोष अग्निहोत्री, क्रीड़ा अधिकारी