सिद्धार्थनगर। डुमरियागज तहसील क्षेत्र के हटवा बुजुर्ग गांव के इमाम बारगाह में रविवार को मरसिया मजलिस आयोजित की गई, इसमें मौलाना ने कलाम पेश किया। मौलाना किरतास करबलाई ने मजलिस के दौरान इराक के कूफस शहर में इमाम हुसैन के चचेरे भाई हजरत मुस्लिम की शहादत को बयां किया। जिसे सुनकर अकीदत मंद रो पड़े।
मरसियाख्वानी कर्रार अहमद और उनके हमनवा द्वारा की गई। मौलाना किरताज ने कहा कि हुसैन के बारगाह में आने से होता है शिक्षा का ज्ञान। कर्बला दुनिया को हक, सच्चाई और इंसाफ का पैगाम देता है। हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में नाना के दीन को बचाने के लिए अपने पूरे घराने को अल्लाह की राह में कुर्बान कर दिया। जिससे पूरी दुनिया को यह संदेश मिलता है कि कभी भी जालिम के आगे सिर नहीं झुकाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन के चचेरे भाई हजरत मुस्लिम को चौदह सौ साल पहले इराक के कूफा शहर के लोगों ने धोखे से बुलाकर उनका और उनके दो नन्हे बच्चों कत्ल कर दिया था, जिसको सुनकर अकीदत मंद फुट फुटकर रोने लगे।