सिद्धार्थनगर। खुदा ने इंसान की पैदाइश का मकसद अपनी इबादत को करार दिया है और उसके रिज्क की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली है। जिससे ये जाहिर होता है कि इंसान को अपने रिज्क की फिक्र में इबादत में कमी नहीं करनी चाहिए। ये बातें बुधवार की रात डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर कस्बा स्थित इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल पर अल मुंतजर कमेटी के तत्वावधान में हुई मजलिस में जाकिर अजीम हैदर रिजवी ने कहीं।
उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सुबह की नमाज दो रकात के बजाए तीन रकात पढ़े तो ये इबादत नहीं कहलाएगी। क्यों कि खुदा के हुक्म के मुताबिक नहीं है। खुदा ने अपने दरबार में हाजिरी के लिए अपने आदमियों यानी नबियों और रसूलों को अपना दरवाजा करार दिया है। कुरआन में ये कहा गया है कि उन घरों में दरवाजे से दाखिल हुआ करो जो जरूरी है। अगर कोई उस दरवाजे से दाखिल नहीं होता तो ये बिलकुल उसी तरह जैसे वह सुबह की नमाज दो के बजाए तीन रकात पढ़ ले। जाकिर ने अंत में मसाएब, कर्बला बयान किया तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। इस दौरान कमेटी के सदर जैगम अब्बास, वजीर, शीबू, मोहम्मद, इस्माइल आदि मौजूद रहे।