नदी की कटान से भूमिहीन हो रहे किसान, जिम्मेदार बेखबर
- हर साल राप्ती नदी की में समाती जा रही है किसानों की जमीन
संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। तहसील क्षेत्र में राप्ती नदी की कटान से बड़ी संख्या में किसान भूमिहीन होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। बावजूद इसके कटान रोकने के लिए कोई ठोस कार्य योजना बनाने में जिम्मेदार नाकाम साबित हो रहे हैं।
नदी के कटान से मेचुका व आसपास के गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। एक तरफ कटान के बाद नदी की दूसरी तरफ निकली भूमि में बालू होने के कारण अनुपयोगी तो होता ही है, इसके लिए विभिन्न पक्षों में विवाद भी उत्पन्न हो जाता है।
बांसी तहसील क्षेत्र में कुछ ही वर्षों में राप्ती नदी के किनारों पर बसे किसानों की लगभग तीन सौ बीघा जमीन नदी के कटान में विलीन हो चुकी है। कुछ किसान भूमिहीन होने की कगार पर पहुंच गए हैं। गदुरहिया और तेलौरा गांव के कई किसानों की जमीन नदी की कटान में समा चुकी है।
किसान बेचन सिंह, वीरेंद्र सिंह, अशोक सिंह, शिवकुमार, संजय सिंह, मंगल सिंह, राम कला, झिनक, पूर्णमासी आदि ने बताया कि नदी के कटान के चलते भूमिहीन हो गए हैं। वीरेंद्र सिंह ने बताया कि कई वर्षों से खेत कटकर नदी में समाता जा रहा है। कटान को रोकने के लिए कई बार अधिकारियों से ठोकर बनाने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
भोला सिंह का कहना है कि सिंचाई विभाग की लापरवाही से कृषकों का नुकसान हो रहा है। ग्राम प्रधान सुजीत सिंह का कहना है कि उनके परिवार का काफी खेत नदी में कट चुका है। साथ ही ग्रामसभा का भी लगभग तीन बीघा खेत कटकर नदी में विलीन हो चुका है, यदि इसी रफ्तार से कटान जारी रहा तो कई और किसान भूमिहीन हो जाएंगे।
इस संबंध मे सिंचाई निर्माण खंड के अधिशाषी अभियंता आरके सिंह का कहना है कि कटान रोकने के लिए ऐसे स्थलों को चिह्नित करके इस्टीमेट भेजा गया है। धन अवमुक्त होते ही कटान का स्थायी समाधान किया जाएगा।