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Ayodhya: जय श्रीराम हो गया काम... नारा सुन चौंक गए थे कटियार

Fri, 12 Jan 2024 04:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
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Ayodhya Ram Mandir Pran Pratishtha - फोटो : Amar Ujala
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 6 दिसंबर 1992 को कारसेवा के दौरान भारी भीड़ अयोध्या में रामजन्म भूमि की तरफ बढ़ रही थी। मैं भी अपने दर्जनों समर्थकों के साथ कारसेवा में शामिल होने के लिए पहुंचा था। कारसेवकों में जोश इस कदर था कि पुलिस की घेराबंदी भी रोक नहीं पाई। जब ढांचा ढह गया तो कारसेवक नारा लगाने लगे, जय श्रीराम-हो गया काम।

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सभी लोग हाथ में ईंट लेकर आ रहे थे, मैं भी था। उस समय विनय कटियार चारपहिया गाड़ी से जा रहे थे। नारा सुनकर उन्होंने गाड़ी रोकी और बड़े उतावलेपन से पूछा- क्या हुआ? मैंने बताया कि ढांचा गिर गया। वह बोले-सच में? मैंने कहा-उसी ढांचे की ईंट है। यह स्मृतियां हैं गरयाकोल गांव के सत्यप्रकाश त्रिपाठी की।

वह अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 की कारसेवा के चश्मदीद हैं। उन्होंने बताया कि कई दिन पहले वे अयोध्या पहुंचे थे। एक मंदिर में शरण ली। मंदिर की तरफ से भोजन की व्यवस्था गई थी। जब हम लोग सरयू तट से जन्मभूमि की तरफ बढ़ रहे थे तब रास्ते में मिले कुछ पुलिस वालों के सामने कारसेवकों ने नारा लगाया-यह तो अंदर की बात है- पुलिस हमारे साथ है।
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इससे कारसेवकों का हौसला बढ़ता गया। अयोध्या से विवादित ढांचे की ईंट को लेकर चला और सरयू में फेंक दिया। शाम को पता चला कल्याण सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। फिर सभी लोग पैदल मनकापुर आए। वहां से ट्रेन से गोरखपुर आए। तब तक हर तरफ कर्फ्यू लग चुका था। सत्यप्रकाश बोले- मुझे सुकून है कि राममंदिर निर्माण में मैंने भी योगदान दिया।

 

और देखते ही देखते ढह गया था ढांचा
गोरखपुर के रहने वाले चंद्रेश्वर सिंह बताते हैं कि वह बजरंगदल से जुड़े थे। विश्व हिंदू परिषद के बद्री सिंह के नेतृत्व में वह 10 लोगों के साथ अयोध्या के लिए निकल गए। वहां पहुंचे तो कहा गया कि प्रतीक कारसेवा होगी। लेकिन, अबकी बार लोग मन बनाकर आए थे कि चाहे कुछ भी हो जाए लेकिन, ढांचा नहीं रहेगा।

वह बताते हैं कि दक्षिण भारत के कारसेवक कुल्हाड़ी, खंती, गैंता आदि लेकर आए थे, जिससे ढांचा गिराया जा सके। अचानक कारसेवक बाबरी ढांचे पर चढ़ गए। लालकृष्ण आडवाणी, आचार्य धर्मेंद्र, साध्वी ऋतभरा सहित अन्य लोग कारसेवकों को मना करने लगे कि ढांचा न तोड़ें। लेकिन, कोई सुनने वाला नहीं था। देखते-देखते ढांचा ध्वस्त हो गया।
 
 
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राजमाता के साथ कारसेवा का मौका मिला
गगहा थाना क्षेत्र के गरयाकोल गांव निवासी रामनगीना राव अपने साथियों के साथ कारसेवा के लिए अयोध्या पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि जब उनके गांव के कुछ साथी अयोध्या जाने लगे और वह भी तैयारी करने लगे तो उनकी पत्नी ने उन्हें घर में बंद कर दिया। बहुत सिफारिश के बाद यह कहकर घर से निकले कि अयोध्या नहीं जाएंगे, लेकिन साथियों के साथ अयोध्या पहुंच गए। जब सरयू नदी से रेत लेकर पहुंचे तो कारसेवक गुंबद पर चढ़ गए थे। देखते ही देखते ढांचा ध्वस्त हो गया।

थोड़ी देर बाद वहां पर एक छोटे से मंदिर का निर्माण भी होने लगा। वहीं पर राजमाता विजयराजे सिंधिया कारसेवा कर रही थीं। वह भी उनके साथ कारसेवा में लग गए। ईंट लाकर देने लगे और राजमाता का सहयोग करने लगे। राजमाता बहुत देर तक वहां रहीं। उसके बाद वह चली गईं तो हम लोग भी निकल लिए।
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