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Siddharthnagar News: इंडो-नेपाल सीमा सड़क पर जांच का ग्रहण, छह माह में नहीं हो पाई 20 करोड़ की रिकवरी

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इंडो नेपाल बॉर्डर की सड़क
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बॉर्डर की सड़क में बिना काम के भुगतान करने के मामले में छह अधिकारियों को नोटिस
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बिना काम कराए ठेकेदार फर्म को हुए 20 करोड़ अतिरिक्त भुगतान मामले की चल रही जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। इंडो-नेपाल सीमा सड़क निर्माण कार्य पर बिना कार्य कराए ही ठेकेदार फर्म को भुगतान मामले की जांच का ग्रहण लग गया है। छह माह पूर्व विभागीय जांच में 20 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान किए गए धनराशि की रिकवरी की प्रक्रिया और जांच के चलते सड़क निर्माण कार्य ठप पड़ गया है। उधर जांच में विभाग के छह अधिकारियों को नोटिस देने के बाद मामला ठंडा पड़ता दिख रहा है। जबकि सड़क निर्माण अधूरा रहने से स्थानीय निवासियों समेत सुरक्षा एजेंसियों को भी आवागमन में सांसत हो रही है।
जिले की नेपाल सीमा पर इंडो नेपाल बार्डर मार्ग परियोजना के तहत मलगहिया बढ़नी से हरिवंशपुर तक 75 किमी सड़क का निर्माण तीन भाग में (31.35 किमी, 15 किमी व 28 किमी) हो रहा है। 15 किमी सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। 11 करोड़ की लागत से 28 किमी सड़क का निर्माण हो रहा है। वहीं बढ़नी से पकड़िया तक 105 करोड़ की लागत से 31.35 किमी सड़क निर्माण कार्य की जांच में अनियमितता की पुष्टि हुई है। बढ़नी से पकड़िया सड़क के निर्माण कार्य के लिए नोएडा की फर्म जेकेएम इंफ्रास्ट्रक्चर से वर्ष 2013-14 में अनुबंध हुआ था। शुरुआत से ही धीमी गति से कार्य चल रहा था। मगर विभागीय अधिकारियों ने वर्ष 2017-18 में मौके पर कम कार्य के बावजूद अतिरिक्त सड़क निर्माण कार्य दिखाकर फर्म को 20 करोड़ रुपये अतिरिक्त धनराशि का भुगतान कर दिया। विभागीय जांच में इसकी पुष्टि हुई है। जिसके बाद विभाग के तत्कालीन चार अधिशासी अभियंता और दो एई समेत छह को नोटिस देने के साथ ही ठेकेदार फर्म को अवशेष कार्य पूर्ण कराने अथवा धनराशि वापस करने के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद छह माह से निर्माण ठप पड़ा हुआ है।
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बदलते रहे अधिकारी चलता रहा खेल
इंडो नेपाल वार्डर मार्ग परियोजना के तहत जिले में बिना सड़क निर्माण कराए ही फर्म को करोड़ों रुपये भुगतान करने का खेल वर्ष 2017 से शुरू हुआ था। विभागीय अधिकारियों ने फर्जी तरीके से सड़क निर्माण की रिपोर्ट भेजकर कंस्ट्रक्शन कंपनी को भुगतान करा दिया। हद तो ये है कि इस बीच अधिकारी बदलते रहे, लेकिन बिना कार्य कराए भुगतान का खेल जारी रहा। वर्ष 2012 में जिले में स्थापित इंडो नेपाल बार्डर के निर्माण खंड कार्यालय में 11 वर्ष में 13 अधिशासी अभियंता बदल गए। बिना कार्य कराए भुगतान कराने से कार्रवाई की जद में आए अधिशासी अभियंता श्रीराज की जिले में पहली तैनाती 18 जुलाई 2014 को हुई थी। इसके एक माह बाद ही उनका स्थानांतरण हो गया। वह एक माह बाद दोबारा यहां तैनात हो गए और दो वर्ष तक रहे। यहां तक कि वह बीच में तीन माह तक शंकर दयाल कन्नौजिया के रहने के बाद वह फिर से वापस आ गए और 19 जुलाई 2017 तक यहां तैनात रहे। इसी बीच यह खेल शुरू हुआ जो बाद में तैनात हुए अनिल कुमार गुप्ता, देशराज गौतम, अनिल कुमार राकेश तक जारी रहा।

अभी भी सड़क निर्माण का संबंधित फर्म पर है जिम्मा

अधिक भुगतान लेने वाली नोएडा की फर्म जेकेएम इंफ्रास्ट्रक्चर के पास अभी भी इस सड़क के निर्माण कार्य की जिम्मेदारी है। अनुबंध के 10 वर्ष बाद भी सड़क निर्माण कार्य की प्रगति बहुत धीमी है। यहां तक कि दूसरी 28 किमी लंबी सड़क का निर्माण कार्य का अनुबंध भी इसी फर्म के पास है। अधिक भुगतान लेने के बाद भी कार्य पूर्ण न करने वाली फर्म पर कार्रवाई नहीं करना विभाग पर सवाल खड़ा कर रहा है। जबकि छह माह से निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।

सुरक्षा एवं आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है सड़क
नेपाल सीमा पर इंडो-नेपाल सीमा सड़क परियोजना के तहत जिले समेत नेपाल के किनारे प्रदेश समेत देश के सभी हिस्से में सड़क बनाई जा रही है। देश की सुरक्षा के लिहाज से यह सड़क महत्वपूर्ण तो है ही, स्थानीय निवासियों को इस सड़क से आवागमन में राहत मिलेगी। इस सड़क के माध्यम से जिले के बढ़नी, शोहरतगढ़, बर्डपुर व लोटन ब्लॉक के कई गांव जुड़ेंगे। साथ ही अन्य स्थानों पर आवागमन में भी इस सड़क के माध्यम से लोगों को सुविधा होगी।
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संबंधित फर्म से सड़क निर्माण कार्य का अनुबंध हुआ है। इसलिए उससे ही गुणवत्तापूर्ण तरीके से सड़क के निर्माण कार्य को पूर्ण कराया जाएगा। जितनी धनराशि का भुगतान हुआ है, उसके सापेक्ष कार्य पूर्ण कराया जाएगा, अन्यथा उससे धनराशि की रिकवरी की जाएगी।

राजेश कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता, इंडो-नेपाल सीमा सड़क परियोजना
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