सिद्धार्थनगर। बाढ़ सहित अन्य आपदाओं से हर बार टूटकर कर्ज में डूबने वाले किसानों को इसबार फसल बीमा से उम्मीद जगी है। बैंक का कर्जदार होते हुए भी किसानों ने फसल बीमा कराया है। आपदा की मार से परेशान किसानों को राहत की उम्मीद इस प्रकार जगी कि जहां हर वर्ष 35 से 37 हजार किसान ही बीमा कराते थे। उनकी संख्या बढ़कर इस बार 55 हजार के पार पहुंच गई है। इसमें खास बात यह है कि 12 हजार ऐसे किसान हैं जो बिना केसीसी वाले हैं। जबकि पिछले वर्षों में 1000 से 1500 के बीच बिना केसीसी वाले किसानों की संख्या रहती थी।
सिद्धार्थनगर जनपद की गिनती प्रदेश के तराई क्षेत्र में की जाती है। यहां मुख्य रूप से किसान दो प्रकार की फसले लगाते हैं। इसमें धान और गेहंू दो फसलों की खेत लगभग 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि पर होती है। लेकिन खरीफ के सीजन में बाढ़ यहां किसानों पर आपदा बनकर टूटती है। बीते वर्ष बाढ़ आपदा में बर्बाद हुई फसलों का बड़ी संख्या में फसल बीमा कराने वाले किसानों को मुआवजा मिला। इसका असर रहा है कि अब किसान राहत की तलाश कर रहे हैं। उनका फसल बीमा कराने की ओर झुकाव बढ़ा है। कृषि विभाग केे आकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष 55 हजार से अधिक किसानों ने फसल बीमा करवाया है। इसमें करीब 37 हजार केसीसी वाले किसान हैं।
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तीन साल में किसान क्रेडिट कार्ड के अंतर्गत हुए लोन का विवरण
आज तक कुल किसान क्रेडिट कार्ड संख्या 46424
राशि. 461.14 करोड़
वित्तीय वर्ष 2022-23 में नए वितरित कार्ड
संख्या-9248
राशि 105.73 करोड़
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2021.22 में नए वितरित कार्ड
संख्या-6090
राशि 56.09 करोड़
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2020.21 में नए वितरित काडज़्
संख्या-3621
राशि- 39.81 करोड़
वर्तमान में कृषि एवं कृषि संबद्ध एनपीए खाते
संख्या 6857
राशि 70.42 करोड़
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फसल बीमा हर किसानों के लिए जरूरी है। हर किसान को फसल बीमा करवाना चाहिए। क्योंकि इसका लाभ फसल का नुकसान होने के बाद किसानों को मिलता है। इस वर्ष फसल बीमा करवाने वाले किसानों की संख्या बढ़ी है।
-मुहम्मद मुज्जमिल, जिला कृषि अधिकारी