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Siddharthnagar News: कचहरी की तरह काट रहे हैं दफ्तरों का चक्कर, कैसे शुरू होगा उद्योग

Tue, 31 Oct 2023 11:51 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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-उद्योग बंधु की बैठक में सामने आया उद्यमियों का दर्द
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कलक्ट्रेट सभागार में मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय उद्योग बंधु, व्यापार बंधु व श्रम बंधु की समीक्षा बैठक में उद्यमियों का दर्द उभर गया। मुख्य विकास अधिकारी जयेंद्र कुमार से उद्यमियों ने उद्योग नहीं शुरू कर पाने की समस्याएं गिनाईं। उनका कहना है कि इन्वेस्टर्स समिट के बावजूद उन्हें सरकारी कार्यालयों में कचहरी की तरह चक्कर लगाना पड़ रहा है। ऐसी ही स्थिति रही तो उद्योग की नींव पड़नी संभव नहीं है।
आदर्श व्यापार मंडल के अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल ने बांसी में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों के अधिकारी सहयोग करें तो उद्योग की राह आसान हो जाएगी। मिनी इंडस्टि्रयल एरिया परसा के उद्यमी अब्दुल रब ने कहा कि बिजली विभाग की लापरवाही से परसा में औद्योगिक फीडर से बिजली नहीं मिल रही है। उद्योग विभाग से बिजली निगम को तीन माह पहले ही बजट प्राप्त हो चुका है। इस कारण उन्हें जेनरेटर से राइस मिल चलानी पड़ रही है। जिस रफ्तार से बिजली निगम का कार्य कर रहा है, उससे अनुमान है कि बिजली के इंतजार में धान का सीजन बीत जाएगा।
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मुख्य विकास अधिकारी जयेंद्र कुमार ने उपायुक्त उद्योग दयाशंकर सरोज से कहा कि इन्वेस्टर्स समिट में एमओयू करने वाले सभी उद्यमियों से संवाद करके समस्याओं का समाधान कराएं। निजी भूमि में उद्योग स्थापित करने के लिए भूमि को अकृषि घोषित करा लें। श्रम प्रवर्तन अधिकारी को श्रमिकों का पंजीयन एवं नवीनीकरण कराने के निर्देश दिए गए।
इस बैठक में अतिरिक्त अपर जिलाधिकारी (वि0/रा0) उमाशंकर, अधिशासी अभियंता बिजली आरके कुशवाहा, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जीवनलाल, लीड बैंक अधिकारी रवि कुमार सिन्हा, सहायक श्रम आयुक्त सुमन सिंह सहित अन्य लोग मौजूद थे।
कोट

मैं 20 लाख रुपये के प्रोजेक्ट से बकरी पालन केंद्र शुरू करना चाहता हूं, लेकिन पोर्टल पर स्वीकृति नहीं मिली है। इस रोजगार के लिए एक साल से प्रयासरत हूं।
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-लालजी जायसवाल, मिठवल

मैं एक करोड़ रुपये से बकरी पालन केंद्र शुरू करना चाहता हूं, लेकिन प्रोजेक्ट को स्वीकृति नहीं मिली है। जमीन प्राप्त हो गई है। कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
-ज्ञानेंद्र सिंह, डढि़या, बांसी
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