सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल की खुली सीमा हमेशा तस्करों के लिए मुफीद साबित हुआ है। कारण यहां पहले भी मादक पदार्थ के साथ तस्कर पकड़े जा चुके हैं। हालांकि पुलिस और पकडऩे वाली एजेसियां यह जानने में नाकाम रहीं कि तस्कर बार्डर पार से लाने वाले मादक पदार्थ को किसी देते हैं। पकडऩे के बाद केस दर्ज करने और जेल भेजने तक ही सिमटकर पुलिस की कार्रवाई रह जाती है। जिसकी वजह तस्करों का नेटवर्क टूट नहीं पा रहा है। सीमा पर लगातार तस्करी जारी है।
नेपाल से लगने वाली जिले की 68 किलोमीटर सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। यह दोनों देशों के बीच रोटी बेटी के संबंध को बरकरार रखने के लिए किया गया है। लेकिन देशविरोधी तत्व खुली सीमा का अकसर गलत उपयोग करते चल आ रहे हैं। तस्कर यहां हावी हैं जो खाद्य पदार्थ से लेकर मादक पदार्थ और सोने चांदी तक की तस्करी करके दोनों देश की अर्थ व्यवस्था को चोट पहुंचा रहे हैं। रविवार रात कपिलवस्तु कोतवाली क्षेत्र के अलीगढ़वा बार्डर से आठ किलो चरस के साथ दो महिलाओं के पकड़े जाने के बाद एक बार फिर बार्डर चर्चा में आ गया है। इनके पकड़े जाने के बाद यह लग रहा है कि सीमा पर मादक पदार्थ की तस्करी शुरू हो गई है।
पूर्व में पकड़ा गया था मादक पदार्थ
बीते वर्ष अगस्त माह में एसएसबी और ढेबरुआ पुलिस ने तीन नेपाली नागरिकों को पकड़ा था। उनके कब्जे से 10 किलो 860 ग्राम चरस बरामद किया गया था। पूछताछ के बाद तीनों पर केस दर्ज करके जेल भेज दिया गया था।
हिमांचल पहुंचाते थे चरस
बीते वर्ष अगस्त माह में पकड़े गए तस्कर वीर बहादुर सहित दो महिला की पहचान नेपाल राष्ट्र के निवासी के रूप में हुई थी। उनके पास से तीन मोबाइल व 18580 इंडियन करेंसी व 6495 नेपाली रुपया बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार पूछताछ में तीनों नेपाली तस्करों ने बताया कि वह इस चरस को नेपाल से कम दाम में खरीद कर भारत के हिमाचल प्रदेश में ले जाकर टूरिस्टों को अधिक दाम में बेच कर लाभ कमाते हैं। इस कारोबार में वह लंबे समय से जुड़े हैं।