बढ़नी। जिले समेत ग्रामीण इलाकों में पराली जलाने की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। प्रशासनिक सख्ती और कानूनी कार्रवाई के बावजूद पराली जलाने का सिलसिला नहीं थम रहा है। इससे प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है जबकि खेतों में मौजूद उपयोगी सूक्ष्म जीव और पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। कई बार आग फैलने से किसानों की संपत्ति और हरियाली को भी नुकसान पहुंचता है। कृषि विभाग की ओर से हैप्पी सीडर, मल्चर और कंपोस्टिंग जैसे विकल्प उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में किसान इनका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। जानकारों ने ग्राम चौपाल, स्कूल और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया है ताकि किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित किया जा सके।