सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय एवं जिले के महाविद्यालयों में विधि की पढ़ाई नहीं होती है। इस कारण जिले के छात्र-छात्राओं को विधि की डिग्री के लिए दूसरे जिले में जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। यही कारण है कि चाहकर भी जिले के छात्र-छात्राएं विधि के क्षेत्र में कॅरियर बनाने में पिछड़ रहे हैं।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के स्थापना के आठ साल बाद भी विधि पाठ्यक्रम शुरू नहीं हो पाया है। बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय नौगढ़, शिवपति स्नातकोत्तर महाविद्यालय शोहरतगढ़, रतनसेन महाविद्यालय बांसी में एलएलबी पाठ्यक्रम संचालित नहीं हो रहा है, जबकि पड़ोसी जिले बलरामपुर, संतकबीरनगर के महाविद्यालयों में विधि शिक्षा की सुविधा है। दूसरे जिलों में रहकर पढ़ाई करना जिले के युवाओं के लिए कठिन साबित हो रहा है। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं की संख्या 1300 से अधिक हो गई। विज्ञान संकाय एवं बीबीए एमबीए पाठ्यक्रम शुरू हो गए हैं, लेकिन विधि की मान्यता नहीं मिली है।
बीए एलएलबी शुरू करने की योजना
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु में बीए एलएलबी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए भवन तैयार हो गया है। विश्वविद्यालय ने यूपी बार काउंसिल को आवेदन भेजा है, लेकिन अब तक बार कौंसिल के पैनल ने जांच नहीं की है। पैनल की जांच के बाद हरी झंडी मिलेगी तो यह पाठ्यक्रम शुरू हो सकेगा। बीए एएलएम को बेहतर माना जा रहा है, इसमें इंटर बाद ही प्रवेश हो जाएगा। एलएलबी में स्नातक डिग्रीधारक तीन साल में डिग्री हासिल करते हैं, जबकि बीए एलएलबी में इंटर पास छात्र-छात्राएं चार चाल में स्नातक के साथ विधि की डिग्री भी हासिल कर सकेंगे।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय ने बीए एलएलबी कोर्स के लिए यूपी बार काउंसिल में आवेदन किया है, लेकिन अब तक पैनल नहीं आया है। यह सेमेस्टर कोर्स है। सितंबर तक भी पैनल की जांच हो जाएगी तो बीच सत्र में पाठ्यक्रम शुरू कर सकते हैं।
- अमरेंद्र कुमार सिंह, कुलसचिव