कोयले के दाम बढे़ तो डेढ़ गुनी हुई ईंट की कीमत
महंगाई से घर बनाने से कतरा रहे लोग, सरकारी कार्यों पर भी असर
सिद्धार्थनगर। पिछले दो वर्ष में ईंट के दाम में डेढ़ इजाफा हुआ है। इससे लोगों को अपना आशियाना बनवाना महंगा पड़ रहा है। ईंट भट्ठा संचालकों का कहना है कि ईंट पकाने में प्रयुक्त होने वाले कोयले की कीमत में दोगुना बढ़ोत्तरी होने से ईंट के दाम बढ़ाने पड़े हैं। साथ ही गांव से शहर तक हो रहे निर्माण कार्यों पर भी इसका असर पड़ रहा है।
वर्ष 2019 में ईंट का मूल्य 10 हजार रुपये प्रति ट्रॉली (प्रति ट्रॉली में दो हजार ईंट होती है) था, जो वर्ष 2020 में बढ़कर 12 हजार रुपये प्रति ट्रॉली हो गई। ईंट की कीमत में अचानक आए उछाल के बाद वर्तमान में मूल्य 16 हजार रुपये प्रति ट्रॉली है। ईंट भट्टा संचालक राजकुमार राय बताते हैं कि ईंट पकाने में प्रयुक्त होने वाले कोयले के दाम में एक वर्ष के अंदर अचानक दोगुना वृद्धि हो गई है। इससे ईंट निर्माण की लागत बढ़ गई है। जो कोयला 11 हजार रुपये मीट्रिक टन मिलता था, वह अब 20 हजार रुपये मीट्रिक टन की दर से मिल रहा है। इससे ईंट के मूल्य में वृद्धि करना पड़ा है।
उसका क्षेत्र के रामदयाल का कहना है कि जब घर की नींव डलवाई थी तो ईंट सस्ती थी, अब मूल्य वृद्धि के कारण मकान निर्माण कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा हूं। ईंट का सरकारी दर कम होने और बाजार दर अधिक होने से सरकारी निर्माण कार्यों पर भी असर पड़ रहा है। ठेकेदार बाजार मूल्य से ईंट खरीदकर निर्माण कार्य कराने और कम भुगतान पाने के कारण सरकारी कार्यों को कराने से परहेज कर रहे हैं।
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12 हजार रुपये ट्रॉली है सरकारी दर
सरकारी विभागों में मान्य पीडब्ल्यूडी के रेट लिस्ट में ए क्लास के ईंट का मूल्य छह हजार रुपये प्रति हजार अर्थात 12 हजार रुपये प्रति ट्रॉली है। बी क्लास के ईंट का सरकारी मूल्य 55 सौ रुपये प्रति हजार अर्थात 11 हजार रुपये प्रति ट्रॉली है। पीडब्ल्यूडी के जेई टीपी सिंह का कहना है कि सरकारी मूल्य का निर्धारण शासन के निर्देश पर सर्वे के बाद होता है। स्थानीय स्तर पर मूल्य निर्धारण में तत्काल फेरबदल नहीं हो सकता।
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असम, झारखंड से आता है कोयला
जिले में ईंट भट्ठों पर कोयला असम, झारखंड, बंगाल एवं बिहार आदि स्थानों से मंगाया जाता है। खदानों से कोयले की रेक निर्धारित स्थानों पर लगाई जाती है, जहां से इसकी आपूर्ति की जाती है। रूस के भी कुछ हिस्सों से कोयले की आपूर्ति की जाती है। ईंट भट्ठा संचालक कहते हैं कि रूस और यूक्रेन युद्ध से भी कोयले के दामों में वृद्धि हुई है और इसकी आवक पर असर पड़ा है।