मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण करते चिकित्सकों के राजस्तरीय टीम। विज्ञप्ति
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल जानने के लिए बुधवार को पहुंची भारत सरकार से नामित राज्य स्तरीय टीम के सामने सारी अवस्था नजर आई। ट्राॅमा सेंटर में मात्र पांच बेड और वह भी शुरू न होने पर नाराजगी व्यक्त की गई। बोले पांच बेड का ट्रॉमा सेंटर होता है क्या, मरीज बढ़े तो कहां ले जाएंगे। यहां जाने के लिए सही रास्ता नहीं है, क्या काम हो रहा है। इसमें जल्द सुधार होना चाहिए।
इसके साथ ही अन्य लैब, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और ओटी में भी टीम ने जानकारी ली। तत्काल सुधार करने का निर्देश दिया।
मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर की जांच करके सुविधाओं की हकीकत जानने के लिए भारत सरकार की ओर से राज्य स्तरीय टीम गठित की गई है। जो मेडिकल कॉलेज में जाकर जांच कर रही है। जो सुविधाएं नहीं हैं, उसे पूरा करने का निर्देश देती है। इसी क्रम में दो सदस्यीय टीम बुधवार को माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज पहुंची। टीम के डॉ. अर्पित श्रीवास्तव पहले इमरजेंसी पहुंचे। यहां मरीजों के साथ भीड़ देखकर चिकित्सकों पर भड़क गए। उन्हें निर्देश दिया कि मरीज के साथ एक व्यक्ति रहेगा। माइनर ओटी देखा तो यहां पर्याप्त साधन नहीं मिला। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब संसाधन नहीं है, तो काम कैसे होता होगा। इसमें तत्काल सुधार किया जाए।
इसके बाद पैथालाजी, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और सिटी स्कैन को देखा। जानकारी ली कि यह कब खुलता है, और कब बंद होता है। इसके साथ ही कितने मरीजों को सुविधाएं प्रतिदिन मिल जा रही हैं। इसके अलावा अन्य वार्ड की जांच की। इसके बाद ट्राॅमा सेंटर देखने के लिए कहा। ट्राॅमा सेंटर तो बन गया है, लेकिन चालू नहीं है, ऐसी जानकारी दी गई। इसके बाद ट्राॅमा सेंटर जांच के लिए पहुंचे। कमरा खुलते ही पांच बेड का वेंटीलेटर युक्त बेड देखकर भड़क गए। बोले यह ट्राॅमा सेंटर है, केवल पांच बेड का सेंटर होता है। मरीज बढ़ गए तो उन्हें कहां ले जाएंगे। उनका क्या किया जाएगा। बेड बढ़ाई जाए, जिससे एक साथ कई मरीजों को लाभ मिल सके।
ट्राॅमा सेंटर तक जाने का रास्ता सही नहीं होने पर ठेकेदार को बुलवाया और रास्ता जल्द बनाने के निर्देश दिए। बिंदुवार जांच करके रिपोर्ट लेकर गए। इस दौरान प्राचार्य डॉ. एके झा सहित अन्य स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे।