सिद्धार्थनगर। साइबर ठगी की आम चर्चा और जागरूकता के बावजूद पढ़े-लिखे लोग भी सेक्सटॉर्शन का शिकार हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर अंजान युवतियां पहले दोस्ती कर रही हैं। फिर बात बढ़ने पर वीडियो कॉल कर अपने जाल में फंसा रही हैं। एक बार चक्कर में पड़ने के बाद लोग बदनामी से बचने के लिए दलदल में फंसते चले जाते हैं। जब पुलिस के पास जाते हैं ताे ठगों से पीछा छुड़ाने को मदद मांगते हैं और केस दर्ज कराने से पीछे हट जाते हैं।
पिछले दो माह में ऐसे आठ मामले सामने आए जिनमें शिक्षक से लेकर ग्राम प्रधान तक ऐसी हसीनाओं के चक्कर में पड़कर मोटी रकम गवां चुके हैं। इन सबकी एक अलग पहचान है। जब वे फंस जाते हैं तो सोचते हैं कि उनकी नामसमझी को कोई जान न सके, इसी का फायदा उठाकर साइबर ठग उन्हें ठग लेते हैं। इधर, इस तरह के अपराध के अधिक मामले सामने आए हैं, तो पुलिस महकमा में भी यह चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, पुलिस के कार्यक्रमों में साइबर क्राइम के जागरूकता की बातें भी होती हैं। जनवरी से इस तरह के साइबर क्राइम की 40 शिकायतें मिली है, जिनमें पुलिस ने 20 मामले में लोगों को राहत पहुंचाई है। केस न दर्ज होने के केस में शिकायत कर्ता को संतुष्ट होने पर पुलिस केस निस्तारित मान लेती है। शिकायत होने पर पुलिस मोबाइल कंपनी से ठगों के एप और बैंक के माध्यम से एकाउंट नंबर बंद करा देती है तो ठग समझ जाते हैं कि मामला थाने तक पहुंच गया और वे उस व्यक्ति को परेशान करना छोड़ देते हैं। साइबर सेल प्रभारी सुभाष यादव ने बताया कि साइबर ठगी के मामले में सबसे पहले पुलिस से शिकायत करें। जो लोग जागरूक हैं, उन्हें अपने मित्रों व रिश्तेदारों को भी जागरूक करना चाहिए।
-
ऐसे करते हैं गुमराह
सोशल मीडिया में फ्रेंड रिक्वेस्ट करते हैं। जब व्यक्ति उनसे जुड़ जाता है तो धीरे-धीरे रिश्ते बेहतर बनाते हैं। उसके बाद युवती की चैटिंग व वीडियो कॉलिंग शुरू होती है। कॉलिंग के दौरान वे स्क्रीन की रिकॉर्डिंग कर लेते हैं। उसी को इंटरनेट पर अपलोड कर देने की धमकी देते हैं। फेसबुक के फ्रेंड लिस्ट को अपलोड करके पीड़ित से दोस्तों रिश्तेदारों तक उनकी अश्लील फोटो भेजने की धमकी देते हैं। पहले कम राशि अपने खाते में मंगाते हैं, बाद अधिक राशि तक पहुंचते हैं और वे बार बार प्रताड़ित करते हुए रुपये एंठते रहते हैं।
-
क्या करें
सइबर सेल के अतुल चौबे ने बताया कि साइबर ठगी का शिकार होने के बाद सबसे पहले पुलिस से शिकायत करें। जितने लोगों को राहत मिली है, सभी मामले में पुलिस ही मददगार बनी है। ठगो को पता चलता है तो वे खुद ही उस मामले से दूर हो जाते हैं। रुपये चले जाए तो जितना जल्द शिकायत करेंगे तो वापसी की संभावना अधिक रहेगी।
इनसे लीजिए सबक
0 ढेबरूआ थाना क्षेत्र के एक ग्राम प्रधान वीडियो कॉलिंग में फंस गए थे। उन्होंने दस हजार रुपये भी गवां दिए। बाद में उन्होंने थाने की पुलिस से मदद मांगी तो मामला साइबर सेल में पहुंचा। उनकी चिंता थी कि बात बाहर गई तो क्षेत्र में उनकी छवि पर असर पड़ेगा।
-
0 शोहरतगढ़ क्षेत्र के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य भी साइबर ठगो के झांसे आ गए थे, लेकिन रुपये देने से पहले ही पुलिस के पास चले गए। उन्होंने बताया कि उनके पुत्र अधिकारी हैं और समाज में उनका सम्मान है। फोटो वायरल हो गई तो आत्म हत्या करने की नौबत आ जाएगी।
0 बढ़नी के एक व्यापारी भी वीडियो कॉलिंग के खेल में फंस गए थे। उन्हाेंने दो बार में 20 हजार रुपये गंवा दिए। इसके बाद भी ठगों ने पीछा नहीं छोड़ा तो पुलिस से मदद मांगे। उन्हें डर था कि बात बाहर गई तो धंधा पर असर पड़ेगा और ग्राहकों की संख्या कम हो जाएगी।
0शहर के एक शिक्षक भी इसी खेल में फंस गए थे। उन्होंने 16 हजार रुपये उनके खाते भेज दिए, लेकिन धमकी का सिलसिला बंद नहीं हुआ। उनकी चिंता थी कि उनके छात्र-छात्राओं में गलत संदेश चला जाएगा। इसी डर से उन्होंने दो बार रुपये भेज दिया।