- शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के बाणगंगा नदी बैराज पुल से कूदी नदी में
- ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने गोताखोरों की मदद से महिला को सुरक्षित बचाया
संवाद न्यूज एजेंसी
शोहरतगढ़। स्थानीय थाना क्षेत्र के बाणगंगा नदी बैराज पुल से सोमवार दोपहर एक महिला ने नदी में छलांग लगा दी। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों व गोताखोरों ने उसे बचा लिया। जब महिला ने जान देने के प्रयास का कारण बताया कि पुलिस भी चौंक गई। महिला ने बताया कि वह छत पर धान सुखा रही थी। इसी दौरान उसकी पति से बात हो रही थी। पति से कहा कि करवाचौथ के बाद घर से दिल्ली कमाने जाना, लेकिन पति जाने की जिद पर अड़ गया था। इसी बात से झगड़ा शुरू हुआ और वह तीन माह के बच्चे को घर छोड़कर जान देने चली गई।
क्षेत्र के झरुआ गांव के टोला भेलौजी निवासी सोनम (23) पत्नी सनोज के अनुसार सोमवार को उसने घर से निकल कर बाणगंगा नदी के बैराज पुल के दक्षिण तरफ से आत्महत्या करने के लिए नदी में छलांग लगा दी। नदी में विवाहिता को छलांग लगाता देख ड्यूटी पर तैनात पुलिस के जवान मौके पर पहुंच गए और मछुवारों की मदद से उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पुलिस ने विवाहिता से आत्महत्या की वजह की जानकारी ली, तो उसने बताया कि सास विद्यावती और ननद निरमा मेरे पति से मेरे बारे में अक्सर झगड़ती रहती हैं, जिसकी वजह से पति सनोज मुझे मारते-पीटते हैं।
जब वह दिल्ली चले जाते हैं तो सास-ननद अकसर झगड़ा करती हैं। इनकी प्रताड़ना से मैं तंग आ गई थी। इसलिए आत्महत्या करने जा रही थी, लेकिन लोगों ने बचा लिया।
इस संबंध में थानाध्यक्ष पंकज कुमार पांडेय ने बताया कि विवाहिता के मामले में लिखापढ़ी करके उसके पति और उसके परिजनों को हिदायत देते हुए सुपुर्द कर दिया है।
-
कोई बड़ी बात नहीं थी
सास-ननद ने बताता कि छोटी-छोटी बात को लेकर अगर बहू को डांट दिया जाता तो वह झगड़ने लगती थी। घर में किसी न किसी बात को लेकर झगड़ा हो जाए तो इसका मतलब ये नहीं कि आत्महत्या कर ली जाए। कोई बड़ी बात नहीं थी।
मायके जाने पर बच्चों को नहीं जाने दिया
पति सनोज ने बताया कि किसी प्रकार की कोई बात नहीं है। दोपहर में छोटे-मोटे झगड़े की वजह से पत्नी मायके जा रही थी। बच्चे को साथ नहीं जाने दिया, तो गुस्से से घर से निकल गई। कुछ देर बाद पुलिस से सूचना मिली कि इसने आत्महत्या करने का प्रयास किया है।
-
विवाहिता सोनम ने कहा कि झगड़े से तंग आकर सोमवार को अपने तीन साल के पुत्र सुमित को लेकर नेपाल स्थित मायका पिपरी गांव जाना चाहती थी, लेकिन बच्चे को पति और सास ननद ने छीन लिया। कहा तुम जाओ हम लोग इसका पालन-पोषण कर लेंगे। इसलिए आत्महत्या करने जा रही थी। अगर बच्चे को लाने दिया होता, तो मैं मायका चली गई होती।
-
पुलिस की वजह से बच गई जान
होली के दिन बाणगंगा बैराज पर एक साथ तीन बच्चों के डूबने से प्रशासन ने सबक लिया था। उसके बाद से वहां पुलिस की ड्यूटी लगा दी गई है। इसी वजह से एक विवाहिता की जान सोमवार को बच गई है। पुलिस घटना देखकर सक्रिय हो गई, और मछुआरों की मदद से विवाहिता को नदी से सुरक्षित निकाल लिया।
-
बिगड़ रहा है सामाजिक ताना बाना
क्षणिक क्रोध के कारण लोग गलत कदम उठा लेते हैं। हालांकि, बच जाने के बाद जान देने की कोशिश करने वालों को भी पछतावा हो रहा है। भारतीय संस्कृति व संस्कार में कमी के कारण ऐसी स्थितियां आ रही हैं। शिक्षा में महान विभूतियां और नैतिक शिक्षा के पाठ कम हो गए हैं। समाज के ताने-बाने में बदलाव आ रहा है। अब बच्चे या बड़े जब जिद पर अड़ जाते हैं तो अपने वरिष्ठ पर ही दोषारोपण करते हैं। अपने सम्मान पर ठेस पहुंचते ही कुछ लोग आवेश में आकर जान देने की कोशिश करने लगते हैं। परिवार में लोगों को अपनों की भावनाओं का आदर करना चाहिए।
-डॉ. हरेंद्र शर्मा, विशेषज्ञ मनोविज्ञान, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु