17 अप्रैल को सायं 5:26 मिनट के अंदर ही करने का है शुभ मुहूर्त
व्रत की पारणा दशमी तिथि में 18 अप्रैल को प्रथम चरण में करने का विधान
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। हिंदू महापर्व वासंतिक चैत नवरात्र व्रत का विशेष महत्व हैं। इसमें हवन और पूजन करने का अलग ही महत्व हैं। ज्योतिष के विद्वान आचार्य के अनुसार नवमी तिथि में हवन पूजन करने का शास्त्रोक्त विधान है। जबकि दशमी तिथि के प्रथम चरण में पारण निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार व्रत का पारण करने का शास्त्रोक्त विधान है।
ज्योतिषाचार्य आचार्य योगेश पांडेय ने कहा कि नौ दिनों तक चलने वाला यह नवरात्र व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। व्रत में पूजा पाठ ध्यान करने से मां दुर्गा प्रसन्न हो कर जातक को मनोवांछित फल प्रदान करती है। मनुष्य के सारे कष्ट भी दूर हो जाते हैं। बताया कि शास्त्रों के अनुसार से महा नवमी का व्रत 17 अप्रैल बुधवार को किया जाएगा। नवरात्र की समाप्ति से संबंधित हवन पूजन नवमी तिथि पर्यंत 17 अप्रैल बुधवार को सायं 5:26 मिनट के अंदर ही करने का शुभ मुहूर्त हैं। कहा कि व्रत की पारणा दशमी तिथि में 18 अप्रैल को प्रथम चरण में करने का शास्त्र विधान है। कहा जबकि अष्टमी का व्रत करने वाले लोग नवमी तिथि के अंत तक पारण कर सकते हैं। सप्तमी, अष्टमी, नवमी तीन दिन व्रत करने वाले भी दशमी तिथि में व्रत का पारण करें। कहा कि जो लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत कर और नवमी तिथि में हवन पूजन करने के बाद पारण कर लेते हैं वह गलत है। शास्त्र विधान के अनुसार नवमी तिथि में हवन पूजन के बाद कुछ घंटे तक व्रत को दक्षिणा के रूप में भी रहने का विशेष महत्व है।
सप्तमी, अष्टमी, नवमी व्रत का महत्व
आचार्य सदाशिव मिश्र ने कहा कि चैत्र नवरात्र की सप्तमी अष्टमी और नवमी पर देवी पूजा के साथ ही श्रद्धा अनुसार व्रत करने पर पूरे दिन का फल प्राप्त होता हैं। कहा कि हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार नवरात्र में हर दिन व्रत उपवास रखने व सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर ही व्रत करने से पूरे नौ शक्ति का फल मिलता है। कहा कि चैत्र नवरात्र की सप्तमी अष्टमी और नवमी पर देवी पूजा और व्रत उपवास से रोग शोक और दोष खत्म हो जाते हैं। इन तीनों दिन तक शक्ति आराधना करने से दुश्मनों पर जीत हासिल होती है। सप्तमी अष्टमी और नवमी पर व्रत उपवास नवरात्रि में देवी दुर्गा की विधि विधान से पूजा की जाती है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार इन दिनों में निराहार यानी बिना कुछ खाए देवी की पूजा करनी चाहिए। हालांकि कई लोगों के लिए यह मुश्किल होता है, इसलिए शक्ति पर्व के आखिरी तीन दिन यानी सप्तमी अष्टमी और नवमी इस तरह से कठिन तप और पूजा की जा सकती है। ऐसा करने से पूरे नवरात्र की पूजा का विशेष फल मिलता है।