सिद्धार्थनगर। शहर समेत जिले में कही भी कोल्ड स्टोरेज नहीं होने के कारण यहां के फल एवं सब्जी व्यापारियों की सांसत तो होती ही है साथ ही इनकी कीमत भी बढ़ जाती है। परिवहन व्यय अधिक लगने के कारण मंडी में फल और सब्जियों की कीमत में बढ़ोतरी होती है। साथ ही ताजी सब्जियां एवं फल की उपलब्धता भी कम होती है।
शहर में 40 वर्ष पूर्व स्थापित कोल्ड स्टोरेज में यहां के व्यापारियों के साथ ही स्थानीय किसान भी आलू एवं अन्य सब्जियां रखते थे। जो समय आने पर कोल्ड स्टोरेज से निकालकर उपयोग अथवा बिक्री करते थे। नवीन मंडी के थोक बिक्रेता यहां कोल्ड स्टोरेज नहीं होने के कारण बस्ती एवं आनंदनगर में स्थित कोल्ड स्टोरेज में फल एवं सब्जी रखवाते है। जब जरूरत पड़ती है तो उन्हें निकालकर उनकी बिक्री करते है। इससे परिवहन व्यय बढ़ने के कारण फल एवं सब्जिया महंगी हो जाती है। उसका क्षेत्र के ग्राम कुआहटा के किसान जगदीश ठकुराई कहते है कि फसल तैयार होने पर खाने एवं बिक्री के बाद बचे आलू को शहर के कोल्ड स्टोरेज में रखते थे। जिसे दोबारा बीज के प्रयोग के समय निकालते थे, साथ ही उस समय अधिक मूल्य होने पर इसकी बिक्री कर मुनाफा भी कमाते थे। अब 25 वर्ष से कोल्ड स्टोरेज बंद होने के कारण घर में आलू रखने से सड़ जा रहा है। महुलानी निवासी किसान मणिकांत ठकुराई कहते है कि यहां कोल्ड स्टोरेज होता तो किसानों के साथ व्यापारियों को भी सहूलियत होती।
शहर में कोल्ड स्टोरेज होता हरी सब्जियाें का कारोबार बेहतर होता और लोगों को ताजा फल एवं सस्ती सब्जियां उपलब्ध होती। कोल्ड स्टोरेज नहीं होने के कारण इनके रख-रखाव पर व्यय अधिक होने से सब्जियां महंगी हो जाती है।
-गणेश साहनी, फल के थोक व्यापारी
कोल्ड स्टोरेज नहीं होने के कारण मौसमी फल के रख-रखाव में परेशानी होती है, साथ ही बाहर स्थित कोल्ड स्टोरेज से ताजे फल मंगाने पर परिवहन व्यय बढ़ जाता है, जिससे फल महंगे बेचना मजबूरी है।
-शिवनंदन श्रीवास्तव, थोक फल व्यापारी