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प्रेम भाव के भूखे होते हैं भगवान : मैत्रेयी

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तरकुलवा। प्रख्यात कथा वाचिका डॉ. लवी मैत्रेयी ने कहा कि भगवान के नजरों में अमीर गरीब, ऊंच-नीच और जाति-पात का भेद भाव नहीं होता है। उनको तो केवल प्रेम भाव की आवश्यकता होती है। भगवान केवल प्रेम की भूखे होते हैं। वह क्षेत्र के सोहनरिया गांव में चले रहे रामकथा के दूसरे दिन रविवार शाम को श्रद्धालुओं को संबोधित कर रही थी। डॉ. मैत्रेयी ने कथा के दौरान भगवान श्री राम और शबरी के मिलन की कथा का जिक्र करते हुए कहा कि शबरी नीच वर्ण की थी, वह रोज भगवान के आने का इंतजार करती थी। रस्ते में फूल बिछाती थी। लोग उन्हें पागल कहते थे, लेकिन उनके प्रेम भक्ति के भाव को समझ कर भगवान खुद ही उन्हें ढूंढते-ढूंढते उनके आश्रम पर पहुंच गए और उनके जूठे बेर तक खाए। कथा वाचिका ने कहा कि आज हमारा राष्ट्र जातियों में बंटने के कारण कमजोर हो रहा है, इसे बचाने के लिए सबको मिलकर प्रयास करना होगा। इस मौके पर आयोजक प्रमोद गुप्ता, पिंटू वर्मा, खजांची गुप्ता, रामपूजन राव, रामजी रौनियर, सुरेन्द्र सिंह, सतीश सिंह, उमेश पटेल सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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