परिषदीय विद्यालय के बच्चों के ड्रेस, बैग व जूता के लिए 1200 रुपये खाते में भेजती है सरकार
जिले में 2700 अधिक विद्यालय में पंजीकृत हैं ढाई लाख से अधिक बच्चे
एक वर्ष में 30 करोड़ से अधिक खरीद के लिए अभिभावकों के खाते में से भेजी जाती है धनराशि
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। अगर आपका बच्चा परिषदीय विद्यालय में पढ़ रहा है तो आपके लिए काम की खबर है। विद्यालय खुलने से पहले बैंक खाते को चेक करवा लें। अगर ई-केवाईसी नहीं हुई तो ड्रेस और जूता के लिए मिलने वाली धनराशि रुक जाएगी। इसलिए पहले से ही खाता दुरुस्त करा लें। क्योंकि 15-20 प्रतिशत लोगों की धनराशि खातों में गड़बड़ी की वजह से अटक जाती है। हर साल पौने तीन लाखों बच्चों के लिए लगभग 34 करोड़ रुपये 1200 रुपये भेजा जाता है। इसमें 20 प्रतिशत राशि रुक जाती है।
सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ ही बच्चों को कई प्रकार की सुविधाएं प्रदान कर रही है। इसमें ड्रेस, जूता मोजा और बैग के लिए 1200 रुपये प्रति बच्चे के हिसाब से अभिभावक के खाते में भेजा जाता है। इस वर्ष विद्यालय खुलते ही अभिभावकों के बैंक खाते में धनराशि भेजी जाएगी। आंकड़ों के मुताबिक जिले में 2262 विद्यालय में 286229 बच्चे पंजीकृत हैं। इनकी पूरी राशि लगभग 34 करोड़ रुपये होती है। लेकिन बैंक खाते में गड़बड़ी होने से 20 प्रतिशत लोगों की धनराशि इसलिए अटक जाती है। इसमें ई-केवाईसी न होने, आधार लिंक न होने सहित कई प्रकार की दिक्कत होने के कारण धनराशि अटक जाती है। इस बार विद्यालय 18 जून से खुल रहा है। इसमें बैंक खाते में रुपये भेजा जाएगा।
विभाग की ओर से डीबीटी से संबंधित प्रक्रिया पूरी कराई गई। जिससे अभिभावकों के खाते में धनराशि पहुंच जाए।
-देवेंद्र कुमार पांडेय, बीएसए