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जहां मतलब है वहां मित्रता संभव नहीं : आलोकानंद शास्त्री

Wed, 17 May 2023 12:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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भनवापुर के बुढ़ऊं में श्रीमदभागवत कथा सुनाते आलोकानंद शास्त्री। संवाद
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भनवापुर। जहां मतलब है वहां मित्रता संभव नहीं, मतलब की मित्रता लंबे समय तक नही चल सकती। ये बातें भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम बुढ़ऊं में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार की रात पं. आलोकानंद शास्त्री ने कहीं।
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उन्होंने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा बचपन से ही संदीपन ऋषि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। शिक्षा ग्रहण करने के बाद सुदामा अपने घर आकर गृहस्थ जीवन व्यतीत करने लगे। समय चक्र बदला और सुदामा जी को गरीबी ने घेर लिया और उन्हें खाने तक को लाले पड़ गए। सुदामा अपनी पत्नी के सामने श्रीकृष्ण की तारीफ करते तो उनकी पत्नी कहती कि मांगों, जिससे गरीबी दूर हो जाए। एक दिन सुदामा, अपने मित्र कृष्ण से मिलने द्वारिकापुरी पहुंचे। भगवान कृष्ण ने मित्र सुदामा का सेवा और स्वागत किया। कुछ दिनों बाद सुदामा ने घर जाने के लिए कहा तो श्री कृष्ण ने सुदामा के पास मौजूद दो मुट्ठी चावल खाकर उन्हें विदा किया। वापस आने पर सुदामा अपने गांव के साथ घर को नहींं पहचान पाए। इस दौरान मस्तराम चौधरी, इंद्रजीत उपाध्याय, आचार्य अनिरुद्ध, अमर, दिलीप, विनोद आदि मौजूद रहे।
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