सिद्धार्थनगर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम अशोक कुमार ने दंगा बलवा एवं लाठी डंडे से मारपीट कर गम्भीर चोट पहुंचाने के मामले में आठ दोषी अभियुक्तों को चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ इन सभी आरोपितों पर आठ-आठ हजार रुपये अर्थदंड जमा करने का फैसला सुनाया।
ढेबरुआ थानाक्षेत्र के ग्राम मटियार उर्फ भुतहवा के टोला भुतहिया में वर्ष 2005 में मारपीट हुई थी। थानाक्षेत्र के ग्राम मटियार उर्फ भुतहवा टोला के भुतहिया निवासी चिन्ने यादव ने पुलिस को दिए तहरीर में कहा कि उसके पिता त्रिभुवन सुबह 7:30 बजे दूध लेकर चौराहे पर दुकानदार को बेचने जा रहे थे, रास्ते में झिन्नन पुत्र जुम्मन ग्राम निवासी मटियार उर्फ भुतहवा, थाना ढेबरूआ त्रिभुवन ने उनसे पूछा कि तुम्हारा नाती हमारी लड़की बदरून्निशा पत्नी मोहम्मद रफी को क्यों गाली दे रहा था? उसके पिता ने कहा कि उनके नाती का कोई दोष नहीं है। इस पर झिन्नन बल्लम, लाठी से प्रार्थी के पिता को प्रार्थी के घारी के सामने सड़क पर मारने लगा। उसके पिता के शोर पर छोटेलाल पुत्र रामसमुझ, बेचन यादव पुत्र चिन्ने तथा उसकी पत्नी अनारा देवी व वह बचाव करने पहुंचा तो झिन्नन की तरफ से ग्राम के मोहम्मद रजा पुत्र मो. हनीफ, छेदी पुत्र इशी मोहम्मद, ईशी मोहम्मद पुत्र सलामत, हसनरजा पुत्र मोहम्मद हनीफ अब्दुल गफ्फार पुत्र मोहम्मद हनीफ, बहाउल्लाह पुत्र सलामत तथा आशिक अली लाठी, बल्लम व अन्य प्राणघातक हथियार अपने-अपने हाथ में लेकर आए और सभी लोग ने ललकारते हुए प्रार्थी तथा प्रार्थी के पक्ष के लोगों को मारकर गम्भीर रूप से घायल कर दिया और जान से मारने की धमकी दी। झिन्नन एवं मोहम्मद रजा के मारने से उसके पिता त्रिभुवन की हालत गम्भीर हो गई।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ दंगा, बलवा, मारपीट, गम्भीर चोट कारित करने, जानमाल की धमकी देने एवं प्राणघातक चोटें पहुंचाने के अपराध में एफआईआर दर्ज किया। न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों, चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट एवं मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों को मद्देनज़र रखते हुए अभियुक्त झिन्नन, मोहम्मद रजा, छेदी, हसनरजा, अब्दुल गफ्फार, बहाउल्लाह, आशिक अली एवं गोबरे उर्फ शरीफ को दंगा, बलवा, मारपीट, गम्भीर चोट कारित करने, जानमाल की धमकी देने के अपराध का दोषी करार देते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
विवेचना के दौरान अभियुक्त इशी मोहम्मद पुत्र सलामत की मृत्यु हो जाने की वजह से उसके विरुद्ध मामला समाप्त कर दिया गया था। न्यायालय ने कहा कि अर्थदंड की संपूर्ण धनराशि का पचास फीसदी पीड़ित को देय होगा, शेष राजकोष में जमा कराया जाएगा। अर्थदंड की धनराशि अदा न करने की दशा में तीन माह के अतिरिक्त कारावास की सजा दोषियों को भुगतनी होगी।