फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: वसूल रहे चार करोड़ विकास शुल्क, दे रहे सड़क के गड्ढों का दर्द

Sat, 30 Sep 2023 01:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। पुराने शहर समेत नगर पालिका के विस्तारित क्षेत्रों में जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों से दो प्रतिशत विकास शुल्क की वसूली की जाती है। यह विकास शुल्क शासन के माध्यम से नगर पालिका को दी जाती है। जिससे शहर में विकास कार्य कराने होते है। शहर में घर बनाने के लिए भूमि खरीदने वालों से प्रति वर्ष चार करोड़ रुपये की वसूली होती है, बदले में उन्हें सड़क के गड्ढों का दर्द और जलभराव की समस्या से जूझना पड़ता है।
विज्ञापन

पिछले माह अगस्त 2023 में नगर पालिका क्षेत्र में हुई 83 जमीनों की रजिस्ट्री में विकास शुल्क के नाम पर 29,82,030 रुपये वसूले गए। अप्रैल 2023 से अगस्त 2023 के बीच पांच माह में नगर पालिका सिद्धार्थनगर क्षेत्र में हुए 564 जमीनों की रजिस्ट्री बैनामा से 1.70 करोड़ रुपये विकास शुल्क के नाम पर वसूले गए। वही एक वर्ष में विकास शुल्क की यह धनराशि चार करोड़ रुपये होती है। यह रकम शासन से नगर पालिका प्रशासन को क्षेत्र के विकास के लिए मुहैया करा दिया जाता है। आलम यह है कि इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद भी वार्डों में समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
वर्तमान में नगर पालिका क्षेत्र में शामिल राजस्व ग्राम तेतरी बाजार, पोखरभिटवा, भीमापार, दतरंगवा, बर्डपुर नंबर 14, थरौली, बेलसड़, जदीशपुर, मुड़िला, बसडिलिया, मधुकरपुर, सनई लंगड़ी, सनई खुर्द, परसा शाह आलम, खजुरिया, सेमरनार, रेहरा, पिठनी खुर्द, पिठनी बुजुर्ग, पकड़ी, पिपरा, सकतपुर, परसा महापात्र आदि शामिल है।
विज्ञापन

इन जगहों पर जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों से पांच प्रतिशत स्टांप शुल्क और दो प्रतिशत विकास शुल्क लिया जाता है। विकास शुल्क की रकम को सरकार के माध्यम से नगर पालिका परिषद को दिया जाता है।
विकसित पुराने नगर पालिका की अपेक्षाकृत नए विस्तारित क्षेत्र में लोग अधिक जमीनों की खरीदारी भी कर रहे हैं। जिससे विकास शुल्क की वसूली भी की जा रही है और यह रकम नगर पालिका को जाता है। इस रकम से नगर पालिका क्षेत्रों में विकास कार्य कराना होता है। लेकिन इन वार्डों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।

निबंधन कार्यालय भूमि में जलभराव, निकासी इंतजाम नहीं
नगर पालिका के लिए विकास शुल्क वसूलने वाले निबंधन कार्यालय के पीछे स्थित भूमि में जलभराव की समस्या है। निबंधन कार्यालय के कर्मियों का कहना है कि दफ्तर के पीछे स्थित भूमि पर वह लोग फूल, सब्जी एवं पौध रोपण करने के साथ ही कृषि कार्य भी कराते थे, लेकिन अब जलभराव के कारण कुछ नहीं कर पाते है। पहले यहां से पीछे की तरफ जलनिकासी हो जाती थी, अब मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जलनिकासी नहीं होने से भूमि तालाब में बदल गई है। कर्मियों का कहना था कि जलनिकासी के लिए नगर पालिका से कहा भी गया, लेकिन अभी तक कोई इंतजाम नहीं हुआ।

जर्जर सड़क, टूटी नालियां का दंश झेल रहे शहरी
पुराने नगर पालिका समेत विस्तारित क्षेत्र में शामिल हुए मोहल्ले भी जर्जर सड़क एवं जलभराव की समस्या से जूझ रहे है। शहर का प्रमुख मार्ग खजुरिया रोड टूटकर गड्ढों में बदल गया है, स्टेशन रोड भी क्षतिग्रस्त हो चुका है। लोग प्रतिदिन इन सड़क के गड्ढों में हिचकोले खाने को मजबूर है। शहर के भीमापार, थरौली आदि मोहल्लों में जलभराव के कारण लोगों का घर से निकलना मुश्किल होता है। शहरी रामनरेश का कहना है कि यह धनराशि मिलने के बावजूद नगर पालिका इन विकास कार्यों को नहीं कराती है। जिससे विकास शुल्क देने के बाद भी लोग समस्याएं झेलने को मजबूर है।
विज्ञापन


वर्जन
शहर में विकास कार्य निरंतर कराए जा रहे हैं। जो सड़कें खराब है, उनकी मरम्मत का प्रस्ताव हुआ है।
-विंध्याचल गुप्ता, ईओ, नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें