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Siddharthnagar News: कोहरे ने फिर बदला मौसम का रंग, बेपटरी हुई जिंदगी

Wed, 11 Jan 2023 04:39 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।
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रेलवे स्टेशन सिद्धार्थनगर के गेट पर ठंड में अलाव की आंच में हाथ सेकते यात्री। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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सिद्धार्थनगर जिले में घने कोहरे ने मंगलवार को मौसम के रंग को बदल दिया। दिन में भी रात जैसी गलन महसूस की गई। ठंड का असर इतना रहा कि लोगों की दिनचर्या जहां प्रभावित हुई वहीं, लोगों की जिंदगी बेपटरी हो गई।

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सोमवार रात कोहरे के कारण रात में तापमान कुछ बढ़कर 7.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जबकि कोहरे के कारण ही दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम विभाग ने अत्यधिक ठंड के दौर में सातवें दिन को भी अति शीत दिवस दर्ज किया।

जिले में मंगलवार सुबह कोहरे में लिपटी हुई थी और जिले में दिन भर कोहरा छाया रहा। कोहरे की बूंदें रिमझिम बारिश की तरह ऊपर से नीचे आ रही थीं। कोहरे के बीच सड़क पर चलने वाले लोगों को दूर तक दिखाई नहीं दे रहा था। गलन इतनी थी कि घर से बाहर कुछ दूर जाने के बाद लोग ठिठुर रहे थे। हेलमेट, जैकेट, टोपी और ग्लब्स के साथ निकले बाइक सवारों को बीच में रुक-रुककर अलाव से गर्मी लेनी पड़ी।
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कहीं लोग लकड़ी के अलाव की आंच में राहत महसूस कर रहे थे तो कहीं कागज और गत्ते जलाए गए। कोहरे के कारण न्यूनतम तापमान 3.5 डिग्री सेल्सियस उछल कर 7.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जबकि अधिकतम तापमान दो डिग्री लुढ़क गया। लिहाजा दिन में रात जैसी ठंड महसूस की गई। शाम होते ही चौक चौराहे ठंड के कारण सुनसान नजर आए।

राज्य कृषि मौसम केंद्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में कुछ बदलाव होने वाला है। बुधवार से बादल रहेगा तो कोहरा कुछ कम हो जाएगा। घने कोहरे में मंगलवार को दृश्यता शून्य थी। लेकिन, बुधवार को दृश्यता भी कुछ बढ़ जाएगी। धीरे-धीरे तापमान में वृद्धि होगी।

सरकारी दफ्तरों में नहीं पहुंचे फरियादी
अत्यधिक ठंड के कारण सरकारी कार्यालयों में फरियादी बहुत कम पहुंचे। तहसील परिसर नौगढ़ में दोपहर 12 बजे एसडीएम, तहसीलदार बैठे थे। उनसे मिलने वाले लोग विभागीय कर्मचारी ही थे। कलेक्ट्रेट में अधिकारी बैठक में थे तो अन्य दिनों की तरह फरियादी मौजूद नहीं थे। विकास भवन में सन्नाटा था। परिसर में अलाव जल रहा था जहां कर्मचारी राहत महसूस कर रहे थे। इसी प्रकार ठंड के कारण बाजार भी गुलजार नहीं था।

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