सिद्धार्थनगर। हर साल बाढ़ में जिंदगी बचाने के लिए बांध, स्कूल और सामुदायिक भवन में शरण लेने वालों को अब रात काटने के लिए सोचना नहीं पड़ेगा। उन्हें डर नहीं सताएगा कि कोई जानवर काट लेगा, भवन ढह जाएगा, भोजन नहीं मिलेगा। उन्हें जर्जर भवन, बांध पर शरण नहीं लेना पड़ेगा। क्योंकि बाढ़ प्रभावित लोगों को शरण देने के लिए स्थायी व्यवस्था होने जा रही है। जिले के पांच तहसीलों में मल्टीपर्पज बाढ़ शरणालय बनेगा। इसके लिए जमीन भी चिन्हित हो चुकी है। 35 करोड़ रुपये की लागत से पांच बिल्डिंगें बनेंगी, जहां सोने खाने सहित अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।
नेपाल बाॅर्डर पर होने के नाते जनपद की गिनती तराई क्षेत्र में होती है। नेपाल की पहाड़ियों की नदियों से जनपद में पानी आता है। सामान्य दिनों में पानी उपयोगी साबित होता है। लेकिन बारिश के दिनों में यही पानी बाढ़ का कहर बनकर लोगों को टूटता है। कहीं बांध टूटता है तो कहीं लोगों को घर बह जाता है। बारिश का सीजन शुरू होने के साथ ही जुलाई से अक्तूबर तक डर और दहशत के बीच लोग दिन गिनते हैं। क्योंकि जब भी भारी बारिश होती है और नेपाल की नदियों को दबाव बढ़ता है तो जिले की नदियां उफान पर आ जाती हैं।
बाढ़ से जिले की 70 प्रतिशत आबादी प्रभावित हो जाती है। इसमें कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां शाम सोते हैं और सुबह घरों में पानी पहुंचा रहता है। फिर बाढ़ में बांध पर खुले आसमान में बारिश के बीच लोगों की रात कटती है। कहीं-कहीं स्कूल और सरकारी भवनों में लोग रहते हैं, वहां पर असुरक्षा में महसूस करते हैं। क्योंकि कब ढह जाए कोई पता नहीं हैं। जाएं तो कहां जाएं यह इनके सामने चुनौती होती है। कारण प्रशासन के पास उस वक्त कोई विकल्प नहीं होता है। हर साल ठहरने के लिए होने वाले संकट को दूर करने के लिए शासन प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। हर तहसील मुख्यालय पर मल्टी मल्टी पर्पज बाढ़ शरणालय बनाने की कवायद शुरू हुई है। जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। लगभग 35 करोड़ की लागत से तीन मंजिला बिल्डिंग बनेगा। दो माह में काम शुरू हो जाएगा। ऐसा विभागीय जिम्मेदार बता रहे हैं।
यहां बनेगा स्थायी बाढ़ शरणालय
लगभग ढाई बीघा रकबा एक शरणालय के लिए लिया गया है। इसमें तीन मंजिला भवन रहेगा। नौगढ़ तहसील क्षेत्र के महरिया, बांसी तहसील क्षेत्र में सूपा राजा, डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में पेंदा, इटवा क्षेत्र में बेलबनवा, शोहरतगढ़ क्षेत्र में जम्हिरिया गांव में जमीन चिन्हित कर ली गई है।
तीन मंजिला होगी बिल्डिंग
तीन मंजिला भवन बनेगा। इसमें हर कमरे में बिजली, पानी, सोने के लिए बिस्तार, खाना बनाने के लिए रसोई, हाल, बैठकर खाने के लिए हाल, शौचालय की व्यवस्था रहेगी।
बाढ़ में लिया शरण, ढहा भवन, तीन की मौत
वर्ष 2022 में अक्तूबर में आई बाढ़ में डुमरियागंज ब्लॉक क्षेत्र के भरवठिया मुस्तहकम गांव में घरों में चार फीट पानी भर गया था। ग्रामीण गांव के पास बने विवाह घर में शरण लिए थे। भारी बारिश में पीलर टूटकर गिर गया। इसमें एक वृद्ध महिला और दो बच्चों की मौत हो गई थी। इस प्रकार बाढ़ में न जाने कितने घर ढह जाते हैं।
पांच प्रमुख नदियों पांच तहसीलों में मचाती है तबाही
जिले में सबसे अधिक शोहरतगढ़ तहसील बाढ़ से प्रभावित होता है। नेपाल से आने वाली बानगंगा उफान पर आने के बाद पूरा क्षेत्र बाढ़ से घिर जाता है। इसके अलावा सहायक नदियां तबाही मचाती हैं। डुमरियागंज और बांसी में राप्ती नदी से बड़ी आबादी प्रभावित होती है। वहीं बूढ़ी राप्ती से इटवा, नौगढ़ और बांसी तहसील क्षेत्र बड़ा हिस्सा प्रभावित होता है।
इतनी आबादी होती है प्रभावित
जिले की आबादी मौजूद समय में लगभग 28 लाख है। 11336 ग्राम पंचायत है और लगभग 2500 गांव और मजरे हैं। इसमें तहसील मुख्यालय को छोड़ दिया जाएगा तो 70 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ से ग्रस्त हो जाता है। आवागमन का मार्ग बंद हो जाता है। लगभग 18 लाख की आबादी पूरी तरह से प्रभावित रहती है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के ठहरने के लिए जिले में पांच बाढ़ शरणालय बनना है। पांच तहसीलों में जमीन चिन्हित हो गई है। कागजी प्रक्रिया अंतिम चरण में हैं। इसके बाद निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
-आरपी चौधरी, अवर अभियंता पीडब्ल्यूडी, बस्ती