सिद्धार्थनगर। दीपावली की त्योहार में छेने और रसगुल्ले की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में महंगे के साथ-साथ सस्ती मिठाइयां भी खप जाती हैं। मिलावटी रसगुल्ले से सेहत भी लोगों की बिगड़ जाती है।
मिठाई में शुद्धता की हकीकत जानने के लिए शहर में अलग अलग हिस्सों में पड़ताल की गई तो रेट में अंतर मिला। शहर में मुख्य चौराहे के करीब दुकानों पर छेने के रसगुल्ले सफेद वाले 370 से 410 रुपये तक मिल रहे थे। वहीं गुलाब जामुन 240 से 250 रुपये की दर से बिक रहे थे। दुकानों पर मिठाइयों के एक्सपायरी डेट भी लिखे नहीं मिले।
400 रुपये में बिकने वाले रसगुल्ला व छेना 200 में मिल रहा है तो उसमें मैदा, सोयाबीन, स्टार्च, उबला व मैश आलू, घी तथा सल्फ्यूरिक एसिड का प्रयोग हुआ है। जो आपको हास्पिटल पहुंचाने के लिए काफी है। ऐसे में मिठाई को जांच कर ही खरीदारी करें।
केमिकल युक्त पाउडर से बनी छेने की मिठाई सेहत के लिए ठीक नहीं है। बाजार में सस्ते छेने वाली मिठाई खरीदने से पहले जांच करना नहीं तो सेहत संबंधी समस्या हो सकती है। धंधेबाज मिलावट कर त्योहार में मोटा मुनाफा हासिल करने की तैयारी में जुटे हैं। छेने की मिठाई क्षेत्र में अलग अलग रेट में बिक रही है। बिहार से आए हलवाई केमिकलयुक्त पाउडर से मिठाई बनाकर सस्ते में बाजार में उतार दिए हैं।
एक दुकान पर काम करने वाले कारीगर ने बताया कि रेट ज्यादा से कोई मतलब नहीं है। मिलावट तो सब में होती है, जिसका रेट थोड़ा अधिक होता है, उसमें मिलावट कम होती है।
कारीगर से मिलावट के खेल को समझने की कोशिश की गई तो उसने बताया कि खोआ ही शुद्ध नहीं रहेगा तो मिठाई कितनी शुद्ध होंगी। महंगाई इतनी है कि पूरा खर्चा लेकर रकम ज्यादा खर्च होती है, इस वजह से थोड़ी बहुत मिलावट कर धंधा किया जाता है। गुलाब जामुन और रसगुल्ले के रेट में हर जगह अंतर मिला।
हाईडिल तिराहे के पास एक दुकान पर रसगुल्ला 400 का भी था। जबकि, उसके पास 200 रुपया किलो वाला भी रसगुल्ला था, दोनों में अंतर पूछा गया तो उसने बताया कि महंगा वाला रसगुल्ला दुकान के कारीगरों ने बनाया है। जबकि सस्ता वाला रसगुल्ला बाहर से मंगवाया गया है। इसके बारे में आगे पूछने पर उसने बताया कि सूखे मिठाई की अपेक्षा रसगुल्ला की मांग अधिक होती है। जबकि कई ग्राहक सस्ते रसगुल्ले की मांग करते हैं। इससे बाजार से पाउडर से बने रसगुल्ले को मंगवाना पड़ता है। जो सस्ता पड़ता है, और ग्राहक भी आसानी से ले लेते हैं।