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Siddharthnagar News: खाद पहुंचने लगी नेपाल, एक-एक बोरी के लिए तरसेंगे जिले के किसान

Wed, 24 May 2023 12:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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भारत नेपाल सीमा खुनुवा बॉर्डर पर एसएसबी टीम द्वारा जप्त किया गया खाद। फाइल फोटो
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सिद्धार्थनगर। जून माह से खरीफ की फसलों की बुआई शुरू होगी। ऐसे में किसान अभी खाद की खरीदारी नहीं कर रहे हैं, लेकिन सीजन से पहले ही तस्कर सक्रिय हो गए हैं। छोटी-छोटी खेप में तस्कर खाद की बोरियों को सीमा पार करा रहे हैं। इस स्थिति पर काबू नहीं किया गया तो बुआई के समय जिले के किसान एक-एक बोरी खाद के लिए तरसेंगे।
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सीमा पर कई बार खाद की बड़ी खेप पकड़ी जा चुकी है। इसके बाद तस्करों ने तरीका बदल दिया और कैरियर के जरिए खाद सीमा पार भेजने लगे। कैरियर का कार्य कोई और नहीं, बल्कि सीमावर्ती गांव के लोग ही कर रहे हैं। वह महज 100 से 200 रुपये प्रति बोरी के लिए खाद इस पार से उस पार पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। जबकि तस्कर को एक बोरी के पीछे 600 से 700 रुपये डीएपी और तीन सौ रुपये प्रति बोरी यूरिया में मिल जाते हैं। 1400 रुपये में बिकने वाली डीएपी की कीमत बार्डर पार होते ही 2000 हजार रुपये हो जाती है। जबकि खाद नेपाल में पहुंचने के कारण जिले में किल्लत बढ़ जाती है। एक-एक बोरी के लिए किसान परेशान रहता है।
नेपाल सीमा से लगने वाली जिले की 68 किलोमीटर सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। यहां बिना रोक टोक के दोनों देश के लोग आते-जाते हैं। लेकिन देशविरोधी तत्व दोनों देशों में बिकने वाली वस्तु की जब भी मांग बढ़ती है तो उसकी तस्करी शुरू कर देते हैं। चाहे वह सोना, चांदी और अन्य सामान हो या फिर अनाज। जिसकी मांग बढ़ी और मुनाफा दिखा, उस वस्तु को सीमा पार करना शुरू कर देते हैं। सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों के अलावा सीमावर्ती थानों की पुलिस तैनात रही है। लेकिन सीमा खुली होने के कारण तस्कर पगडंडियों का भी सहारा लेते हैं। खरीफ का सीजन शुरू हो गया है। जून माह से जिले में धान की खेती करने में किसान जुट जाते हैं। तभी वह खाद खरीदना शुरू करते हैं। लेकिन तस्कर सीजन शुरू होने पहले ही नेपाल पहुंचाने का कार्य शुरू कर देते हैं। जैसा की मौजूदा समय में देखा जा रहा है। पिछले एक माह से तस्कर डीएपी और यूरिया खाद नेपाल में पहुंचाने लगे हैं।
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सीमा पर पकड़ी गई गेहूं की खेप
1 - पिछले सप्ताह एसएसबी 43वीं वाहिनी के जवानों ने बजहा क्षेत्र में एक गांव के पास बाग से 21 बोरी डीएपी बरामद की थी। जांच में पता चला कि तस्कर नेपाल ले जाने के लिए बाग में खाद एकत्र कर रहे थे। इसकी जानकारी बाग के मालिक को भी नहीं थी। रात के अंधेरे में तस्कर खाद को सीमा पार करा देते।

2 - मार्च माह में मोहाना पुलिस ने सीमा से सटे बभनी गांव में राजस्व प्रशासन के साथ छापा मारा था। मौके से 50 बोरी यूरिया बरामद की गई थी। तस्कर बोरी खोल करके खाद को डेहरी में रखा था। मांग शुरू होते ही नेपाल में भेजना शुरू कर देते।

3. मोहाना क्षेत्र में ही ककरहवा सीमा क्षेत्र से तीन बार बाइक और साइकिल से यूरिया ले जाते जाते हुए एसएसबी जवान पकड़ चुके हैं।

बड़ी खेप पकड़ी गई तो बदल दिया तस्करी का तरीका
जब खाद की बड़ी खेप पकड़ा जाने लगा तो तस्करों ने पैंतरा बदल दिया। अब तस्कर कैरियर का सहारा लेने लगे हैं। बेरोजगारों को पकड़कर 100-200 रुपये बोरी दे रहे हैं। बस उन्हें साइकिल से इस पार से उस पार करना रहता है। जितना चक्कर उतना रुपया मिल जाता है। यह इसलिए कि सुरक्षा एजेंसियां भी किसान बताने पर छोड़ देती हैं।

एक स्थान पर होता है स्टोर, फिर नेपाल पहुंचती है खाद
तस्कर की ओर से तैयार किए गए कैरियर को यह बताया जाता है कि खाद यहां से लेकर फला स्थान पर जाकर रखना है। तय स्थान पर पहुंचने के बाद माल को नेपाल की मंडी में पहुंचाया जाता है। जहां पर उसका भाव लगता है।

बिना किसी टैक्स के होती है लंबी बचत
नगर निवासी खाद कारोबारी सर्वेश ने बताया कि खाद पर सभी प्रकार का टैक्स लगकर आता है। कहां कितनी कीमत में बिकना है, पहले ही तय होकर आता है। इसलिए किसी प्रकार का टैक्स नहीं देना पड़ता है। जब बार्डर पार कर देते हैं तो बिना किसी शुल्क के भारी मुनाफा होता है।

सीमावर्ती क्षेत्र की दुकानों से उठाते हैं खाद
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक बड़े कारोबारी ने बताया कि ककरहवा, हरिवंशपुर, खुनुवां, बजहा और आगे तक तस्करों का जाल फैला हुआ है। जो सीमावर्ती क्षेत्र के दुकानों को सेट कर लेते हैं। इसके बाद सीजन शुरू होने से पहले ही खाद खरीदकर बार्डर पार पहुंचा देते हैं।

नेटवर्क का बहाना बना फर्जी किसान के नाम बेच देते हैं खाद
कृषि विभाग का दावा है कि विक्रेता खाद को तभी बेच सकेगा। जब ई-पास मशीन पर किसान का अंगूठा लगेगा। लेकिन सीमावर्ती क्षेत्र में नेटवर्क न होने का बहाना बना विक्रेता अंगूठा न लगने की बात कहकर रजिस्टर में नाम लिखाकर खाद बेच देते हैं। सूत्रों के मुताबिक सीमावर्ती क्षेत्र के जानने वादे किसानों के नाम डालकर खाद पार कर दी जाती है।

खरीफ सीजन में जिले में आवंटित होती है इतनी खाद
जिले में लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती है। आकड़ों के मुताबिक इतने रकबे के लिए 11800 मीट्रिक टन डीएपी, 53874 मीट्रिक टन यूरिया, 1451 मीट्रिक टम एनपीके, एमओपी 577 मीट्रिक, सुपर फास्फेट 10445 मीट्रिक टन आवंटित होता है।


इसलिए नहीं रुक रही तस्करी
नाम नहीं छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सीमा पर पकड़ी जाने वाली हर वस्तु को कस्टम को सुपुर्द कर दिया जाता है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पकड़ा गया माल कस्टम सौंप देती हैं। और मामूली जुर्माना लगाकर कस्टम उन्हें छोड़ देता है। जिसकी वजह से तस्कर काम बंद नहीं कर रहे हैं। लगातार तस्करी जारी है। अगर कार्रवाई कठोर होती तो शायद तस्करी बंद हो जाती।

बोले अधिकारी
नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों के साथ सीमावर्ती थानों की पुलिस अलर्ट है। हर संदिग्धों से पूछताछ की जाती है। अवैध रूप से बार्डर पार सामान ले जाने की कोशिश करने वालों को पकड़कर कार्रवाई की जा रही है।
- अमित कुमार आनंद, एसपी सिद्धार्थनगर


अनियमिता मिलने पर दर्ज होगा केस
सीमा पर खाद की तस्करी अगर हो रही है तो उसके रोका जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्र की उर्वरक की दुकानों की जांच करेंगे। गड़बड़ी करने वाले दुकानदारों के खिलाफ केस दर्ज करवाया जाएगा।
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- सीपी सिंह, जिला कृषि अधिकारी, सिद्धार्थनगर
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