फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: पिता ने एक माह के दूधमुंहे को मां से किया अलग, 17 दिन में मौत

Fri, 28 Jul 2023 10:30 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ कस्बा के रमजान गली मोहल्ले में मां से अलग कर दिए गए एक माह के बच्चे की 17 दिन में ही मौत हो गई। मां का आरोप है कि उसके पति ने दहेज के लालच और दूसरी शादी के चक्कर में उसके बेटे को मारपीट कर छीन लिया और हत्या कर दी। मां की शिकायत पर डीएम के आदेश पर शिशु का शव कब्र से निकाल शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन

क्षेत्र के गोल्हौरा गांव निवासी शबनम की 15 माह पहले शोहरतगढ़ कस्बे के रमजान गली निवासी नफीश से शादी हुई थी। शबनम का आरोप है कि शादी के कुछ महीने बाद से ही पति नफीश उसे दहेज के लिए मारता-पीटता और प्रताड़ित करता था। ससुराल के लोग उसे खाना नहीं देते थे, पड़ोसी एवं मोहल्ले के लोग उसे खाना खिलाते थे। इसी बीच वह गर्भवती हो गई, पांच जून को दर्द होने पर मुहल्ले वालों ने उसको अस्पताल पहुंचाया। जहां उसने एक पुत्र को जन्म दिया। उसके बाद उसके पति ने उसे मायका ले गया। उसको वहां छोड़ कर बच्चे को छीन लाया। जहां 22 जुलाई को मासूम की मौत हो गई। इसकी जानकारी होने पर 23 जुलाई को शबनम ने पुलिस को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की। सुनवाई नहीं होने पर उसने डीएम संजीव रंजन से गुहार लगाई। डीएम के निर्देश पर पुलिस ने बच्चे का शव कब्र से निकाल कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। एसओ शोहरतगढ़ पंकज पांडेय का कहना है कि मामले में अभी तहरीर नहीं मिली है, तहरीर व पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पति, सास, ननद व नंदोई पर प्रताड़ित करने का आरोप
पीड़ित मां शबनम का कहना है कि अस्पताल से घर आने उसे मारपीट कर बच्चा छीन लिया गया और उसे मायका भेज दिया गया। उसका आरोप है कि पति, सास, ननद, ननदोई व दो अन्य लोगों ने उससे मारपीट कर बच्चा छीना है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि नफीश बच्चे को घर के परिजनों को सौंप कर इधर उधर रहता था। पीड़ित मां शबनम का आरोप है कि उसका बेटा मां की ममता और भूख से तड़फ रहा होगा। ससुराली उसके बेटे की देखभाल नहीं किए, इसलिए उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन

-
चेती होती पुलिस तो बच सकती थी मासूम की जान
पीड़ित मां का आरोप है कि उसने बच्चा छीने जाने के बाद स्थानीय पुलिस समेत कई जगहों पर पत्र देकर बेटे को वापस पाने की गुहार लगाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिस कारण उसके एक माह के बच्चे की जान चली गई। अधिवक्ता अखंड प्रताप सिंह व कृपाशंकर त्रिपाठी का कहना है कि एक माह के बच्चे को मां से अलग नहीं किया जा सकता। उसके जीवन के लिए मां के दूध के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं होता है। यह अमानवीय कृत्य है। पुलिस मामले में त्वरित कार्रवाई की होती तो बच्चे की जान बच सकती थी।

मां के दूध से शिशु में पैदा होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय चौधरी का कहना है कि यदि मां जीवित है तो बच्चे को छह माह तक सिर्फ मां का दूध देना चाहिए। मां का दूध सुपाच्य होता है और उससे बच्चे के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। यदि मां किसी बीमारी के बाद ठीक हुई होती तो बच्चे में उसकी एंटीबॉडी चली जाती है। यदि बच्चा बाहर का दूध पीता है तो उसके शरीर में बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। दूध कम मिला तो बच्चा कुपोषित हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें