सिद्धार्थनगर। फसल अवशेष जलाने से होने वाली हानि और प्रदूषण को देखते हुए जिलाधिकारी ने किसानों से उसे जलाने के बजाए जुताई और अन्य विधि का उपयोग करके खाद के रूप में प्रयोग किए जाने की अपील की है। जिससे खेत की उर्वरा शक्ति बनी रहे और धुएं से होने वाले वायुप्रदूषण से बचा जा सके। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनपद में धान की फसल का क्षेत्रफल 1,74,000 हेक्टेयर पर लगी है। धान की फसल की कटाई प्रारंभ हो चुकी है।