कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में प्रशिक्षण शिविर आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सोहना केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार ने कहां कि बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से किसानों को सिंचाई और जल संरक्षण की पहल से जोड़ने के लिए ड्रिप इरिगेशन प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत ड्रॉप मोर क्रॉप सिंंचाई योजना जल संरक्षण के क्षेत्र में काफी मुफीद साबित हो रही है। वे कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में किसानों को संबोधित कर रहे थे।
रवि शंकर पांडेय ने कहा कि भू-संरक्षण का अर्थ है उन सभी उपायों को अपनाना तथा कार्यान्वित करना जो भूमि की उत्पादकता को बढ़ा दें। मृदा को अधोगति या अपरदन ह्रास से सुरक्षित रखे, अपरदित मृदा को पुनर्निर्मित और पुनरुद्धार कर दे, फसलों के उपयोग के लिए मृदा नमी को सुरक्षित कर दें तथा जमीन की आय को बढ़ा दें।
केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत ने वर्षा जल संरक्षण के लिए तालाब निर्माण एवं घरों का पानी इकट्ठा करने के लिए टैंक निर्माण के बारे में बताया और बीज उत्पादन से संबंधित जानकारियां दीं।
डॉ. प्रवीण कुमार मिश्रा ने सिंचाई की विभिन्न विधियों पर चर्चा की। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एसके मिश्रा ने फसलों के समसामयिक विषय पर चर्चा की। डॉ. मार्कंडेय सिंह ने वर्षा जल संचय के लिए बनाए गए तालाब मैं मछली पालन करके अतिरिक्त लाभ कमाने तथा सूखे की स्थिति में फसलों की सिंचाई के बारे में बताया। इस दौरान मंसूर अली, वीरेंद्र कुमार, दिनेश पांड,विजय कुमार, धनपाल चौधरी, ओम प्रकाश चौरसिया और गया प्रसाद आदि उपस्थित थे।