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Siddharthnagar News: मिलीभगत से चल रहे थे फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटर, जांच हुई तो लग गया ताला

Sat, 12 Aug 2023 01:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से जिले में फर्जी अल्ट्रासाउंड जांच सेंटर संचालित हो रहे थे। स्वास्थ्य विभाग के छापा अभियान में एक माह में चार अल्ट्रासाउंड मशीनें सील हो गईं, जबकि पांच माह में अल्ट्रासाउंड के मामले में सात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जबकि जांच अभियान अभी जारी है।
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शोहरतगढ़ क्षेत्र में जनहित अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद इलाज में लापरवाही उजागर हुई तो प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच अभियान तेज कर दिया। जांच के दौरान ही निजी अस्पतालों में इलाज में लापरवाही से दो महिलाओं की मौत के बाद अभियान और तेज हो गया। लगातार छापे मारे गए तो 11 निजी अस्पताल सील हो गए। सीएमओ कार्यालय की सीढि़यों पर चढ़ते हुए एक युवक ने कहा कि अब तक सेटिंग से अल्ट्रासाउंड सेंटर चल रहे थे। इस मामले में डिप्टी सीएमओ डॉ. एमएम त्रिपाठी ने बताया कि उनके पीसीपीएनडीटी का प्रभार संभालने के बाद छह अल्ट्रासाउंड मशीन सील हुई हैं।

यहां हुई कार्रवाई
- शहर के मारिया हॉस्पिटल में अप्रशिक्षित युवक के अल्ट्रासाउंड करने का मामला सामने आया
-प्रशांत पैथोलॉजी में बिना रेडियोलॉजिस्ट के अल्ट्रासाउंड हो रहा था
-बर्डपुर के विद्या हॉस्पिटल में एक प्रशिक्षित व्यक्ति के माध्यम से अल्ट्रासाउंड करने की रिपोर्ट मिली
-सिंह अल्ट्रासाउंड सेंटर उसका में अवैध तरीके से संचालन के कारण अल्ट्रासाउंड मशीन सील की गई
-शोहरतगढ़ के अजंता हॉस्पिटल में अल्ट्रासाउंड सील कर दी गई
-हिंदुस्तान फार्मा एवं जोहरा फार्मा जिगिनिहवा में मेडिकल स्टोर की आड़ में अल्ट्रासाउंड हो रहा था

दो रिपोर्ट हुई गलत
दर्ज हुआ बच्चा चोरी को केस
आशा हॉस्पिटल बर्डपुर में एक महिला को बच्चा पैदा हुआ तो उसके परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। कहा कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में डॉक्टर ने जुड़वा बच्चे बताया था। एक ही क्यों हुआ? इस मामले में जांच हुई तो बर्डपुर के आशा हॉस्पिटल और विद्या हॉस्पिटल बंद हो गए। इस मामले में अस्पताल संचालक व डॉक्टर के खिलाफ बच्चा चोरी को केस दर्ज हुआ है।
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जांच में दोषी साबित हुई डॉक्टर
शहर के अलसहारा हॉस्पिटल में इलाज के बाद एक मरीज के पति ने आरोप लगाया कि उनकी गर्भवती पत्नी की अल्ट्रासाउंड जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर ने बताया था कि बच्चा जीवित नहीं है और उन्होंने गर्भपात की दवा लिख दी। किसी कारण से मरीज ने दवा नहीं खाया और बाद में जांच हुई तो बच्चा जीवित निकला। इस मामले में शिकायत हुई तो जिलाधिकारी ने जांच समिति बना दी। जांच समिति ने जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। इस मामले में जिलाधिकारी संजीव रंजन ने बताया कि जांच में डॉक्टर को दोषी पाया गया है, कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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