जोगिया क्षेत्र के कटहना निवासी विजय मिश्र ने बताया कि पिछले वर्ष जिले से 75 टन काला नमक चावल निर्यात हुआ था। सिंगापुर और नेपाल में चावल निर्यात हुआ था, लेकिन पहली बार दुबई में पांच टन का आर्डर मिला हुआ था। एक बार अनुबंध होने के बाद निर्यात शुल्क बढ़ गया और चावल नहीं भेजा जा सका।
निर्यात शुल्क में बीस प्रतिशत बढ़ोत्तरी के कारण काला नमक चावल का कारोबार प्रभावित हो रहा है। तीन माह पहले गैर बासमती चावल पर निर्यात शुल्क बढ़ा दिया गया है। इस कारण फसल कटने के बाद काला नमक चावल की विदेश में बिक्री कठिन हो गई है। महंगे दर पर निर्यात का नियम होने से कारोबारी टूट गए हैं, जबकि किसानों को भी नुकसान हुआ है।
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केंद्र सरकार ने बीते सितंबर में गैर बासमती चावल का निर्यात शुल्क बढ़ा दिया। बासमती चावल को विशेष वस्तु के अंतर्गत एचएसएन (हार्मोनाइज्ड सिस्टम ऑफ नोमेनकलेचर) जारी है। इस निर्यात कोड के कारण बासमती पर बढ़ा हुआ निर्यात शुल्क लागू हुआ, जबकि गैर बासमती के अंतर्गत काला नमक चावल पर भी सामान्य चावल की तरह निर्यात पर शुल्क जमा करना पड़ रहा है।
यहीं कारण है कि जिन कारोबारियों ने निर्यात के लिए विदेशी संस्थाओं से बात की थी, उन्होंने चावल विदेश में नहीं भेजा है, क्योंकि निर्धारित मूल्य से 20 प्रतिशत अधिक कीमत प्राप्त होने पर ही चावल भेजा सकता है।
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वर्ष 2018 में ओडीओपी में शामिल होने के बाद काला नमक चावल का प्रचार-प्रसार राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की गई। काला नमक के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए तत्कालीन जिलाधिकारी दीपक मीणा को पीएम अवार्ड भी मिला। जिलाधिकारी संजीव रंजन ने काला नमक चावल का निर्यातक बोर्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन निर्यात शुल्क बढ़ने से नई समस्या खड़ी हो गई है।
जिले में काला नमक धान की खेती का रकबा 15 हजार हेक्टयर के करीब हो गया है। किसानों को भी पहले की अपेक्षा की डेढ़ गुनी कीमत प्राप्त हो रही है, लेकिन इसको विदेश भेजने में समस्या उत्पन्न हो गई है। प्रशासन ने शासन को पत्र भेजा है, लेकिन सार्थक परिणाम हासिल नहीं हो सका है।
उपायुक्त उद्योग दयाशंकर सरोज ने बताया कि एचएसएन कोड के लिए पत्राचार किया गया है। निर्यात कोड जारी होने के बाद काला नमक चावल का वैश्विक स्तर पर प्रचार हो जाएगा।
जोगिया क्षेत्र के कटहना निवासी विजय मिश्र ने बताया कि पिछले वर्ष जिले से 75 टन काला नमक चावल निर्यात हुआ था। सिंगापुर और नेपाल में चावल निर्यात हुआ था, लेकिन पहली बार दुबई में पांच टन का आर्डर मिला हुआ था। एक बार अनुबंध होने के बाद निर्यात शुल्क बढ़ गया और चावल नहीं भेजा जा सका। काला नमक चावल का एचएसएन कोड जारी होना आवश्यक है।
नेपाल में भेजा जा रहा है धान
काला नमक चावल की सीएफसी के निदेशक अभिषेक सिंह ने बताया कि निर्यात शुल्क बढ़ने पर नेपाल में भी काला नमक चावल नहीं भेजा जा रहा है, जबकि चावल की बजाए धान भेजा रहा है। कुछ माह पहले नेपाल में काला नमक चावल भेजने की बात हुई थी, उसमें दर को लेकर फिर बात हो रही है। सीएफसी खेसरहा में 100 टन चावल रखा हुआ है, लेकिन निर्यात प्रभावित होने से समस्या बढ़ गई है।
काला नमक चावल को एचएसएन कोड जारी करने के लिए जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर ने शासन को पत्र भेजा है। अपर मुख्य सचिव के साथ प्रगतिशील किसानों की बैठक होनी है। जब आयातक और निर्यातक, दोनों देश पहल करते हैं तो कोड जारी होता है। -अनुराग सिंह, जोन प्रभारी बस्ती।
काला नमक चावल को एचएसएन कोड दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा। इस मामले को सदन में उठाया जा रहा है। बासमती की तर्ज पर काला नमक के निर्यात का रास्ता साफ किया जाएगा। काला नमक के लिए सरकार ने निरंतर प्रयास किया है, निर्यात कोड भी जारी होगा। -जगदंबिका पाल, सांसद।