सिद्धार्थनगर। दुआ करिए कि इस बार बाढ़ न आए। क्योंकि बांध सुरक्षा के लिए 75 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने के बाद भी रेनकट और रैट होल के कारण जर्जर हुए बंधे बाढ़ की लहरों को झेलने लायक नहीं बन पाए हैं। बंधों की तस्वीर देखने पर प्रशासन की तैयारियां खोखली साबित हो रही हैं।
सिंचाई विभाग में मनरेगा से स्वीकृत प्रोजेक्ट के अंतर्गत बाढ़ सुरक्षा के कार्य किए जा रहे हैं। पिछले साल स्वीकृत कार्य दो माह पहले तक पूरे हुए हैं, जबकि बाढ़ आने का जोखिम है तो बांधों की सुरक्षा के प्रोजेक्ट स्वीकृत किए जा रहे हैं। आशंका है कि इस सत्र में स्वीकृत प्रोजेक्ट बरसात बीतने से पहले पूरे नहीं हो पाएंगे।
पिछले वर्ष जिले में 169 जगहों पर मरम्मत करवाने के लिए 7295.11 लाख रुपये के बजट की स्वीकृति सिचाई विभाग को मिली थी, जिसमें से 130 जगहों की मरम्मत सिचाई विभाग ने करवाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी बांधों का हालत जस का तस है। ऐसे में क्षेत्र के ग्रामीण डरे हुए हैं। विभाग ने जिस क्षेत्र में काम पूरा दिखाया है, वहां की हालात भी खराब है।
मनरेगा विभाग ने 230 जगहों पर मरम्मत करवाने के लिए सिचाई विभाग व डीएनएच खंड को जिम्मेदारी दे है। इसके बाद भी सभी बांधों पर अभी तक काम पूरा नही हो पाया है। यदि इस बार भी बाढ़ आई तो लाखों किसानों की फसल, मकान व बाग बाढ़ में बह जाने का जोखिम होगा, क्षेत्र के लोग परेशान हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी स्तर पर बंधों का काम मानक के विपरीत होने से हल्की सी बारिश में कटान होने लगी है, ऐसा ही रहा तो इस बार भी बाढ़ क्षेत्र के लोगों को अपने घरों से पलायन करना पड़ेगा।
बाढ़ के समय भी दे रहे हैं स्वीकृति
पिछले वर्ष का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है, लेकिन इस बार भी सिंचाई विभाग व डीएनएच खंड में 49 जगहों पर 1268.07 लाख रुपये की स्वीकृत दी है। विभागीय लापरवाही के कारण प्रभावित क्षेत्रों के लोग चिंतित हैं। जहां कटान हुई थी, वहां भी तस्वीर अब भी पुराने जख्म हरे कर रही है।
आधा अधूरा कार्य छोड़कर ठेकेदार हुए फरार
सिद्धार्थनगर। शाहपुर भोजपुर बांध के कटान स्थल पर अब भी कहीं कोई कार्य नहीं हुआ है। जिन जगहों पर इस वर्ष बोल्डर पैचिंग का कार्य हुआ था, वहां दो दिन के बारिश और नदी के उफान में लगभग 30 मीटर तक बोल्डर बह गया है। जिसको देखकर ग्रामीणों में डर है कि पिछले साल की तरह इस साल भी कहीं हम सबको घर से बेघर ना होना पड़े। बांध निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार आधा अधूरा बंधा बनाकर गायब हो गए हैं।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में बन रहे शाहपुर-भोजपुर बांध निर्माण का कार्य दो वर्ष पूर्ण होने के बाद भी कटान स्थल का बचाव कार्य पूर्ण नहीं हो सका है, जबकि विभाग के जिम्मेदारों को कटान स्थल की पूर्ण रूप से जानकारी भी है। पिछले साल आई बाढ़ में काफी जद्दोजहद के बांध कटने से बचा था। रमवापुर पुर उर्फ नेबुआ निवासी विजय कुमार ने कहा पिछले साल हमारे बाग के समीप शाहपुर भोजपुर बांध पर राप्ती नदी कटान कर रही थी, जिस पर जेई और ठेकेदार के काफी मशक्कत से कटान स्थल को बचाया गया, लेकिन इस वर्ष इन जगहों पर ठोकर नहीं लगाया गया, जिससे राप्ती के बड़े बढ़ते जलस्तर से कटान होने से बचाया जा सके। पेंडारी निवासी विजयभान चौधरी ने कहा कि जहां कार्य हुआ है, उन बांधों पर भी कार्य कराने की आवश्यकता है।
डरा रहे हैं रेन कट व रैट होल
सिद्धार्थनगर। कूड़ा घोंघी बांध पर रैनकट व रैट होल की भरमार है। बांधों की सफाई नहीं हुई है, बांधों के होल और कटान झाड़ियों में छिपी हुई है।स्थानीय निवासी अब्दुल रहमान के अनुसार बांध पर रैट होल तभी मालूम पड़ेगा। जब बांध के दोनों तरफ से झाड़ को सही तरीके से निकाला जाए। बांध पर बड़े-बड़े रैनकट हैं, पंकज बरनवाल ने बताया कि रात के समय बांध से वाहन लेकर चलना खतरे से खाली नहीं है। अक्सर लोग इन्हीं रैनकट में गिरकर चोटिल हो जाते हैं। राम अचल ने बताया कि रमवापुर से मोतीपुर तक बांध के दोनों तरफ जंगल जैसा दृश्य है।
वर्जन
बांधों की सुरक्षा के लिए मनरेगा से कार्य कराए जा रहे हैं। दो सत्रों में बंधों की सुरक्षा पर 75 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य कराए गए हैं। प्रोजेक्ट के अनुसार सिंचाई विभाग की ओर से कार्य कराए जा रहे हैं।
- रविशंकर पांडेय, उपायुक्त, श्रम रोजगार