-निष्प्रयोज्य घोषित होने के चार साल बाद भी नहीं मिली गिराने की स्वीकृति, अब निजी भवन की हो रही तलाश
-लोटन में मंगलवार को जर्जर छत का प्लास्टर गिरने से पिता की मौत, बेटा हो चुका है जख्मी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। कंडम घोषित होने के बाद भी नौगढ़ पीएचसी और इटवा सीएचसी का जर्जर भवन संचालित हो रहा है। इसमें मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। अगर भवन ढह गया और कोई हादसा हो गया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। जहां लोग जान बचाने के लिए इलाज कराने जाते हैं, वहीं जान को खतरा है। इलाज कराना मजबूरी है, इस कारण लोग जान जोखिम में डालने को मजबूर हो रहे हैं। सीएचसी इटवा और पीएचसी नौगढ़ दोनों सरकारी अस्पतालों को चार साल पहले निष्प्रयोज्य घोषित किया गया, लेकिन अभी तक इन भवनों को ध्वस्त नहीं किया गया। इसमें परत छोड़ चुके छत के नीचे ओपीडी में मरीजों को परामर्श दिया जा रहा है और उन्हें भर्ती करके इलाज भी किया जा रहा है।
सीएमओ कार्यालय और शासन के बीच अनेक बार हुए पत्राच्चार के बाद सीएचसी इटवा के भवन के ध्वस्त करने की स्वीकृति मिली है। अब इस भवन को गिराने का टेंडर होगा, उसके बाद बजट आवंटित होगा तो नया अस्पताल बनेगा। जब तब नए अस्पताल का भवन नहीं होगा। इसी तरह पूरी तरह से जर्जर हो चुके शहर के पीएचसी नौगढ़ में जाने वाले स्वास्थ्य कर्मी एवं मरीज डरे रहे हैं, बरसात में हादसे का डर और बढ़ जाता है। स्वास्थ्य अधिकारियाें के अनुसार बार-बार पत्राचार के बाद भी अस्पताल के ध्वस्तीकरण की स्वीकृति नहीं मिली है। इस कारण ओपीडी चलाई जा रही है, लेकिन प्रसव केंद्र बंद कर दिया गया है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवकाश पर बृहस्पतिवार दोपहर 12 बजे तक ओपीडी थी, जिसमें 56 मरीजों का पंजीयन हुआ। शहर के छोटू मोदनवाल ने कहा कि यहां इलाज कराने के लिए खतरे के बावजूद भी यहां आना पड़ता है। वहीं थरौली की गीता देवी ने कहा कि इस सरकारी अस्पताल में डर लगता है, लेकिन जिला अस्पताल में मरीजों की लंबी लाइन लगती है, इसलिए यहीं आ जाती हूं।
बरामदे के टूटकर गिर रहे प्लास्टर के बीच वार्ड ब्वाय विनोद कुमार के साथ इंटर्नशिप कर रहे फार्मासिस्ट महबूब आलम व शाहिद पर्ची काटते दिखे। वहीं पीछे की कक्ष में इंटर्नशिप फार्मासिस्ट हुजैफा, अनन्या व खुशी दवा बांटते दिखी। बीते दिनों छत गिरने से हुए हादसे की घटना से इन स्वास्थ्य कर्मियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही थीं। उनका कहना था कि जो भी हो, विभागीय कार्य तो करना ही है। पीएचसी परिसर में पीछे की तरफ स्थित जर्जर आवासों की स्थिति और भी दयनीय है। मंगलवार रात लोटन क्षेत्र में छत का प्लास्टर गिरने से पिता की मौत व पुत्र के घायल होने की सूचना से सहमे स्वास्थ्य कर्मियों का कहना था कि वह हर दिन इसी खतरे के बीच काम करते हैं।
ओपीडी के लिए तलाश रहे भवन
पीएचसी अधीक्षक डॉ. प्रशांत मौर्य ने बताया कि पीएचसी में जर्जर भवन में इलाज कराना जोखिमपूर्ण है। ओपीडी को निजी भवन में शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, अभी तय नहीं हुआ है कि किराये का भुगतान कैसे होगा। स्वास्थ्य विभाग की कोशिश है कि कोई दानदाता कुछ माह के लिए बिना किराये का अपना भवन दे दें।
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सीएचसी में भर्ती थे दो मरीज, परिजन बोले मजबूरी है
इटवा में 1989 में सीएचसी का निर्माण हुआ और 2020 में इसे निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया, लेकिन इसमें मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। सीएचसी में बुधवार को ओपीडी में 367 मरीजों को परामर्श व दवाइयां दी गई थी, जबकि बृहस्पतिवार शाम दो मरीज भर्ती थे।परिजन भवनेश्वर प्रसाद यादव ने कहा कि छत की परत उजड़ी हुई दिख रही है, लेकिन निजी अस्पतालों में जाना हो तो बहुत रुपये चाहिए। मजबूरी यहीं आ आ गए।
इटवा में सरकारी अस्पताल में भवन गिरने का डर है, लेकिन निजी अस्पताल का बिल बहुत लंबा होता है। जान जोखिम में डालकर इलाज करा रही हूं।
चांदनी, कमदालालपुर
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ओपीडी में दवा लेकर घर जाना चाहती थी, लेकिन डॉक्टर ने भर्ती कर दिया। भवन देखकर ऐसा लगता है कि कभी भी हादसा हो सकता है, लेकिन मजबूरी में इलाज करा रही हूं।
मंजू, परसा खुर्द,
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जलभराव से बंद हुआ प्रसव केंद्र
पीएचसी नौगढ़ परिसर में स्थित प्रसव केंद्र जलभराव के चलते 11 अगस्त से ही बंद कर दिया गया है। अब यहां गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी नहीं होती है, यहां आने वाले केस मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिए जाते हैं। वहीं इससे पहले से ही मुख्य भवन में जलभराव के चलते ओपीडी बंद हो चुकी है, जो दूसरे कक्षों में किसी तरह से संचालित की जा रही है। यहां तक यहां फर्श पर रखे गए कागजात व दवाइयां जलभराव के कारण नष्ट हो जा रहे हैं।
40 साल पहले बना था, चार साल पहले बना निष्प्रयोज्य
करीब 40 वर्ष पूर्व निर्मित पीएचसी नौगढ़ के मुख्य भवन समेत सभी आवासीय परिसर को 2020 में पीडब्ल्यूडी ने जांच कर निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया था। इसके बाद भी मुख्य भवन समेत कई आवासीय भवन का उपयोग हो रहा है। वर्तमान में तीन दिन पूर्व हुई बारिश से मुख्य भवन में जलभराव की स्थिति है, इस कारण दूसरे भवन में ओपीडी चल रही है। परिसर में स्थित कुछ आवासीय भवन तो खाली हो चुके है, लेकिन इनमें कई भवनों का उपयोग लोग रहने के लिए कर रहे हैं। यहां तक कि परिसर में स्थित एक जर्जर भवन में खुद पीएचसी अधीक्षक डॉ. प्रशांत मौर्या रहते हैं।
और भी है जर्जर और निष्प्रयोज्य भवन
शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर एवं निष्प्रयोज्य हो चुके कई सरकारी भवनों में कर्मचारी काम करते हैं और रहते भी हैं। शहर में स्थित पीडब्लूडी, ड्रेनेज खंड सिंचाई व वन विभाग के कार्यालय एवं आवासीय परिसर में स्थित कई भवन जर्जर हो चुके हैं। निचले हिस्से में स्थित इन कार्यालयों एवं आवासीय परिसर में जलभराव तो रहता ही है, साथ ही जर्जर होने से यहां के लोग हर समय हादसे के डर से सहमे रहते है। वर्तमान में जलभराव के चलते यहां रहने वाले कर्मचारी पलायन किए हुए है। ड्रेनेज खंड के जर्जर आवासीय परिसर में रहने वाले कर्मी भवन में मरम्मत के इंतजार में है।
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ढह रहा ग्राउंड फ्लोर, ऊपर रह रहा परिवार
पीएचसी परिसर में पीछे स्थित आवासीय भवनों के ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह जर्जर होने के साथ ही ध्वस्त हो रहे हैं। इनमें जलभराव होने के कारण कोई नहीं रहता है, लेकिन इन्हीं में एक भवन के प्रथम तल के एक हिस्से में एएनएम गीता देवी बहु और दो बच्चों के साथ रहती है, शेष हिस्सा खाली है। जलभराव के बीच रखे ईंट से होकर वह सड़क से सीढ़ी तक पहुंचती है। वह भवन की हालत से हर समय डरी सहमी रहती है। बगल के दूसरे जर्जर भवन के प्रथम तल के एक हिस्से में दो बच्चे, पति व मां के साथ रह रही स्टाफ नर्स अनामिका राज कहती है कि यहां रहना खतरे से खाली नहीं है, लेकिन मजबूरी में रहते हैं।
छत गिरने से जिले में हो चुके हैं बड़े हादसे
लोटन थाना क्षेत्र के ग्राम एकडेंगवा के टोला यादवडीह में मंगलवार रात में घर के बरामदे में सोये पिता व पुत्र पर छत का प्लास्टर टूटकर गिर गया। जिससे मौके पर ही पिता मोहनलाल यादव (59) मौत हो गयी। जबकि पुत्र रामकुमार (15) गंभीर रूप से घायल हो गया। 16 अक्टूबर 2022 को डुमरियागंज थाना क्षेत्र के भरवठिया मुस्तहकम गांव में विवाह घर में शरण लिए बाढ़ पीड़ितों पर पिलर गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसमें राजसिंह चौहान (13 ), पूनम (18) व रिंका (24) की मौत हो गई थी। यहां अगर छत गिरता और भी बड़ा हादसा हो सकता था, क्योंकि यहां हादसे की रात वहां 25 से अधिक लोगों ने शरण लिया था।
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वर्जन
इटवा सीएचसी के भवन के ध्वस्तीकरण की स्वीकृति मिली है, लेकिन नौगढ़ पीएचसी के ध्वस्तीकरण के लिए पत्रावली शासन में भेजी गई है। नौगढ़ पीएचसी में प्रसव केंद्र बंद कर दिया गया है। ओपीडी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है, उसे निजी भवन में शिफ्ट किया जाएगा।
डॉ. बीके अग्रवाल, सीएमओ