सेना के जवान के बेटे की मौत के मामले में चिकित्सक पर लगा था इलाज में लापरवाही करने आरोप
जिलाधिकारी ने एक सप्ताह में जांच कर कार्रवाई करने का दिया था आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सेना के जवान के नवजात बेटे की मौत के मामले में सवा माह बाद भी कोई नतीजा सामने नहीं आया है। जबकि जिलाधिकारी ने मामले का खुद संज्ञान लेते हुए चिकित्सक पर लगे आरोपों की जांच करके एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रेषित करते हुए कार्रवाई के लिए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को जिम्मेदारी दी थी। आरोप लगाने वालों और वार्ड में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों के बयान भी हो चुके हैं।
खेसरहा थाना क्षेत्र के बनकटा गांव निवासी राज सिंह सेना के जवान राज सिंह की पत्नी की डिलीवरी 18 सितंबर को हुई थी। उसी दिन रात में एकाएक बच्चे की हालत बिगड़ी तो चिकित्सकों ने मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करने की सलाह दी। वार्ड में लेकर पहुंचे तो पता चला कि चिकित्सक नहीं हैं। उधर, बच्चे की हालत बिगड़ रही थी। उनका आरोप था कि नर्स से ऑक्सीजन लगाने के लिए कहा तो वह नहीं सुनी।
लगभग 2:50 बजे चिकित्सक एसएल पटेल शराब के नशे में गुटका चबाते हुए पहुंचे। जब उनसे इलाज के बारे में कहा गया तो इलाज करने के बजाय बिना बच्चे को देखे ही बोले कि स्थिति खराब है और रेफर कर दिए। गोरखपुर ले जाते समय धानी के पास ही बच्चे की मौत हो गई थी।
राज सिंह ने प्राचार्य को शिकायती पत्र देकर मामले की जांच करके चिकित्सक पर कार्रवाई की मांग की है। मेडिकल कॉलेज के गेट पर लोगों ने चिकित्सक के विरोध में घंटों हंगामा किया था। मामले को स्वत: संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने प्राचार्य को तीन सदस्यीय टीम गठित करके एक सप्ताह के भीतर मामले की जांच करके कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट देने के लिए कहा था।
इस मामले में शिकायतकर्ता के बयान टीम ले चुकी है। इसके साथ ही वार्ड में तैनात सभी स्टाफ को बयान देने के लिए टीम ने बुलाया था। उनके भी बयान हो चुके हैं। लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है। जबकि शिकायकर्ता सेना के जवान कई बार फोन के जरिए संपर्क करके रिपोर्ट के बारे में जानकारी ले रहे हैं।
प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि शुरुआती दौर में शिकायत कर्ता के बयान देने नहीं आने के कारण जांच में देर हुई। फिलहाल, जांच समिति ने उन्हें रिपोर्ट नहीं दी है।