सिद्धार्थनगर। जिले में उद्योग को आगे बढ़ने की राह में बिजली विभाग की लापरवाही सामने आ रही है। इन्वेस्टर्स समिट के जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों के बड़े-बड़े वायदे से जो उम्मीद बढ़ी थी, वह टूट रही है। उद्योग से तरक्की के लिए उत्साहित उद्यमियों को बिजली के लिए मायूस होना पड़ रहा है। बिजली के अभाव में उनका कारोबार घाटे में जा रहा है, जबकि उद्योग के कर्ज पर ब्याज भी बढ़ता जा रहा है।
संवाददाता ने शुक्रवार को मामले में पड़ताल की तो उभरते हुए छोटे उद्यमियों की राह में बिजली के रोड़े अटकने का हकीकत सामने आया। छह उद्यमी ऐसे मिले, जिन्हें बिजली निगम की लापरवाही से नुकसान उठाना पड़ रहा है। ये समस्याएं छिपी नहीं हैं, जबकि उद्योग बंधु की बैठक में उद्यमियों ने जिलाधिकारी पवन अग्रवाल, मुख्य विकास अधिकारी जयेंद्र कुमार और उपायुक्त उद्योग दयाशंकर सरोज ने कई बार अपना दुखड़ा रोया है। वे कचहरी की तरह बिजली विभाग के दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी जा रही है।
जिले में 227 उद्यमियों ने 9856.9 करोड़ रुपये निवेश का अनुबंध किया है, लेकिन पांच करोड़ रुपये तक राइस मिल, विनियर सहित अन्य उद्यमियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उपायुक्त उद्योग दयाशंकर सरोज ने बताया कि उद्यमियों से संवाद किया जा रहा है, जहां भी समस्याएं आ रही हैं, वहां समाधान कराया जा रहा है।
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फाेटो-संजीव जायसवाल
बिजली के कारण निरर्थक हुआ इन्वेस्टर्स समिट 2018
जिले में 2018 में पहली बार इन्वेस्टर्स समिट हुआ था, जिसमें संजीव जायसवाल एवं अब्दुल रब ने राइस मिल लगाने का अनुबंध किया था, लेकिन बिजली के अभाव में दोनों प्रोजेक्ट अटक गए थे। पुरानी नौगढ़ के संजीव जायसवाल ने बताया कि उन्होंने सजनी में राइस मिल चलाने के लिए 15 हार्स पॉवर का कनेक्शन लिया था, लेकिन बिजली निगम ने पोल पर तार खींचने से पहले ही बिल भेजना शुरू कर दिया और पांच साल बाद भी तार नहीं खींचा गया है। उन्होंने काम अधूरा छोड़ दिया है, जबकि बिना बिजली उपयोग के ही 1.50 लाख रुपये बिल आ गया है। इस बिल को माफ कराने के लिए वे बिजली अधिकारियों को अर्जी दे रहे हैं। अब्दुल रब ने बताया कि उन्होंने बिजली कनेक्शन मांगा तो औद्योगिक फीडर के लिए फंड मांगा गया। शासन से यह फंड मिलने में चार साल देर हो गई।
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आठ माह बाद भी लाइन अधूरी
मिनी औद्योगिक क्षेत्र परसा में पांच करोड़ की राइस मिल लगाने वाले अब्दुल रब घाटे से उबरने की कोशिश में है। उन्होंने बताया कि मार्च 2023 में बिजली निगम को औद्योगिक फीडर बनाने के लिए शासन से 93.27 लाख रुपये मिल गया था, लेकिन आठ माह बाद भी राइस मिल तक बिजली नहीं पहुंची है। श्रमिकों के ठेकेदार ने उन्हें बताया कि बिजली विभाग से सामान नहीं मिला है। वे जेनरेटर से राइस मिल चलाते हैं तो एक घंटे में 14-15 लीटर डीजल खर्च होता है।
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बिजली कटते ही जाम हो जाता है मोटर
इटवा के संतोष कुमार ने बताया कि राइस मिल चलाने के लिए 22 लाख रुपये खर्च करके बिजली कनेक्शन लिया है। क्षेत्र में बिजली के तार जर्जर होने के कारण आए दिन फॉल्ट होता है। इस कारण रात में मिल चलाते हैं, क्योंकि दिन में ज्यादा फॉल्ट होता है। एक बार चलती राइस मिल में बिजली जाती है तो मोटर जाम हो जाता है और उसे साफ करने में 30-40 मिनट समय लगता है। शिकायत के बावजूद तार बदले या कसे नहीं जा रहे हैं।
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दो माह बाद भी नहीं मिला विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र
जोगिया में लकड़ी कटाई के लिए विनियर का काम करने के लिए दो माह बाद भी विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है। बिजली के अभाव में जनरेटर से काम करने पर हर घंटे 10 लीटर डीजल खर्च हो रहा है। विनियर संचालक निशांत ने बताया कि बिजली अधिकारियों ने एक सप्ताह में एनओसी देने का आश्वासन दिया है।
डेढ़ माह बाद भी नहीं लगाया मीटर
डुमरियागंज कस्बे में राइस मिल चलाने वाले संतोष कुमार ने बताया कि उन्होंने राइस मिल के लिए डेढ़ माह पहले बिजली कनेक्शन लिया,जिसमें लिए 8.16 लाख रुपये जमा किया है। राइस मिल तक बिजली का तार पहुंच गया है, लेकिन मीटर नहीं लगा है। इस कारण उनका नुकसान हो रहा है।
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पोल हटाने के लिए लगा रहे दौड़
मोहाना क्षेत्र के ऊंजी में सोहराब ने राइस मिल लगाया है। उन्होंने 1.5 करोड़ रुपये खर्च करके राइस लगाया है। बिजली विभाग ने खंभा तार खींचा तो उनके बताए हुए स्थान के बजाए गेट के पास पोल लगा दिया गया। इस कारण उनकी मिल में जाने के लिए ट्रेलर नहीं मुड़ पा रहा है। पोल को आठ फीट पीछे करने के लिए उन्होंने चार माह में कई बैठकों में अपनी बात रखी। बताया गया था कि जेई के सर्वे के बाद पोल का स्थान बदला जाएगा, लेकिन यह कार्य नहीं हुआ।
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वर्जन
उद्योग लगाने में बिजली विभाग से संबंधित समस्याएं उद्योग बंधु की बैठक में आई थी। बिजली विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि समस्याओं का शीघ्र ही समाधान करें।
-जयेंद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी